
छत्तीसगढ़ के शिमला में उगाई जा रही अनेकों बीमारियों को खत्म करने वाली
रायपुर.छत्तीसगढ़ के शिमला यानी मैनपाट की आबो-हवा टाऊ की फसल को अब रास आने लगा है। स्थानीय किसानों के बीच टाऊ काफी लोकप्रिय हो गई है, जो ब्लड प्रेशर कम करने में मददगार साबित होगी। यह आम कुकीज की तरह शरीर में वसा नहीं बढ़ाती, बल्कि इसमें मौजूद प्रोटीन और आयरन सेहत को बेहतर बनाने में कारगर हैं। यह कुकी टाऊ के आटे से तैयार की जा रही है। मैनपाट में शुरूआती तौर पर तिब्बती शरणार्थियों द्वारा टाऊ को उगाई जाती रही है।
फायदेमंद
टाऊ की पैदावार आठ-दस क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। किसानों से टाऊ की खरीदी 3500 से 4000 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जाती है। इससे तैयार आटा को महानगरों में इसके आटा को 150 से 200 रूपए प्रति किलो की दर से बेचा जाता है। यह आटा व्रत एवं उपवास के दौरान फलाहार के रूप में उपयोग किया जाता है। टाऊ को बक व्हीट के नाम से भी जाना जाता है। प्रोटीन, ऐमिनो ऐसिड्स, विटामिन्स, मिनरल्स, फाइबर एवं एन्टी ऑक्सिडेन्ट प्रचुर मात्रा में होने के कारण टाऊ काफी पौष्टिक खाद्य माना जाता है। इसका प्रोटीन काफी सुपाच्य होता है और इसमें ग्लुटेन नहीं पाया जाता। इसमें अनेक औषधीय गुण भी पाए जाते हैं जिसकी वजह से अनेक बीमारियों से बचाव में यह उपयोगी है। यह हृदय रोग, डायबिटीज, कैन्सर और लिवर के लिए फायदेमंद है। यह कई खतरनाक रोगों से लडने में भी फयदेमंद है. इसके छिलकों का उपयोग मेडिकेटेड गद्दों और तकियों के निर्माण में होता है।
टाऊ के फूल से सैलानी हो रहे आकर्षित
टाऊ के फूल पंडरापाठ और मैनपाठ की पहाडिय़ों को और भी खूबसूरत बना देते हैं। टाऊ की फसल में खिले खूबसूरत फूल यहां आने वाले सैलानियों को बेहद आकर्षित करते हैं।
Published on:
09 Jan 2020 12:55 am
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