
टीबी जांचने की मशीन से होगा कोरोना टेस्ट, राज्य में आ रही 14 मशीनों से तेजी से होगी जांच
रायपुर. टीबी (क्षय रोग) की जांच के लिए उपयोग में लाई जाने वाली मशीन का इस्तेमाल अब कोरोना वायरस की पहचान करने में किया जाएगा। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल एंड रिसर्च ने (आईसीएमआर) ने जांच की इस पद्धति को कोरोना टेस्ट के लिए अनुमति दे दी है। छत्तीसगढ़ अभी एक भी टू्र-नॉट मशीन नहीं है। मगर, जल्द ही 14 मशीन आने जा रही है। इनमें से 11 मशीन राज्य खुद खरीद रहा है और तीन मशीन केंद्र सरकार मुहैया करवाने जा रही है। इसे कोरोना जांच की तीसरी पद्धति कहा जा रहा है। खास बात यह है कि इस चिप आधारित जांच से परिणाम 30 मिनट में आएंगे।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में टीबी के मरीज काफी अधिक हैं। इसलिए राज्य सरकार ने अपनी नीति के तहत कोरोना संक्रमण की फैलाव के पहले ही मशीन खरीदी के आर्डर जारी कर दिए थे। तब यह पता नहीं था कि इस मशीन का इस्तेमाल कोरोना की जांच में होता है। अब जब आईसीएमआर ने मंजूरी दे दी है, तो राज्य के लिए बड़ी खबर है। क्योंकि राज्य में भी रोजाना बामुश्किल 350 टेस्ट ही लग पा रहे हैं। इस मशीन के आने से संख्या काफी बढ़ेगी। राज्य ने टू्र-नॉट मशीन से कोरोना टेस्ट के लिए चिप खरीदी के भी आदेश जारी कर दिए हैं।
क्या है यह मशीन- भारत में ट्रू-नॉट मशीनों का इस्तेमाल उन टीबी की जांच के लिए किया जाता रहा है जिनमें दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां टीबी के मरीज सर्वाधिक हैं। ये मशीन राज्य के टीबी प्रभावित जिलों में लगाई जाएंगी।
कोरोना वायरस को जांचने की तीन तकनीक-
वायरोलॉजिकल टेस्ट-
समय- 6 घंटे लगते हैं
कुल जांच- तीन लैब में तकरीबन 350 सैंपल
- प्रदेश में वर्तमान में एम्स रायपुर, पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज रायपुर और स्व. बलीराम कश्यप मेमोरियल मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में कोरोना की वायरोलॉजिकल लैब स्थापित है। यहां अभी आरएनए-पीसीआर पद्धति से रोजाना ३५० टेस्ट हो रहे हैं। इसमें नाक और गले से सैंपल लेकर जांच की जाती है।
रेपिड टेस्ट-
समय- ३० मिनट
कुल जांच- जितनी चाहें उतनी की जा सकती है
- आईसीएमआर द्वारा रेपीड टेस्ट की अनुमति मिलने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य को ४५०० किट मुहैया करवाई है, जिनमें से २ हजार किट कटघोरा को दी गई हैं। यहां टेस्ट भी शुरू हो चुके हैं। रेपीड किट व्यक्ति के शरीर में मौजूद संक्रमण का पता लगाने में सक्षम है। इसके लिए एंटीबॉडी 'आइजीएमÓ पॉजिटिव आएगा। वहीं कोरोना से मुक्त हो चुके मरीज में वर्षों बाद भी पता चल सकेगा कि वह पहले इससे संक्रमित रह चुका है।
ट्रू नॉट मशीन से टेस्ट-
समय- 30-40 मिनट
कुल जांच- कितनी भी की जा सकती है
- आईसीएमआर ने ट्रू-नॉट टीएम बीटा सीओवी जांच को मान्यता देते हुए कहा है कि इसे कोरोना के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। आइसीएमआर ने अपने दिशा-निर्देशों में कहा है कि इन जांच के दौरान नाक और गले से सैंपल लेकर इसे किट के साथ दिए गए वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम में रखकर भेज जाएगा। इस जांच में जो पॉजिटिव निकलेंगे उनकी आरटी-पीसीआर द्वारा जांच कर कोरोना की पुष्टि की जाएगी।
राज्य पहले से टीबी जांच की मशीनें खरीद रहा था। तभी आईसीएमआर ने कहा कि इस मशीन का इस्तेमाल भी कोरोना टेस्टिंग में किया जा सकता है, जो अच्छी खबर है।
-डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, उप संचालक एवं प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग
Published on:
19 Apr 2020 09:47 pm
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