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चाय वाले की बेटी ने फुटबॉल वर्ल्ड कप में मचाया धमाल, फर्स्ट रैंक हासिल कर देश को किया गौरांवित

कोई भी मंजिल दूर नहीं होती, बस खुद के ऊपर कॉन्फिडेंस और हार से न डरने की काबिलियत होनी चाहिए

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चाय वाले की बेटी ने फुटबॉल वर्ल्ड कप में मचाया धमाल, मेडल हासिल कर देश को किया गौरांवित

सूर्य प्रताप सिंह@रायपुर. हाल ही में एमसी मैरीकॉम ने वर्ल्ड चैम्पियनशिप में छह गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराया है। वे विश्व की पहली महिला बॉक्सर हैं, जिन्होंने यह रेकॉर्ड बनाया। मैरीकॉम उन महिलाओं व गर्ल्स के लिए प्रेरणा हैं जो अपने सपने को खत्म कर देती हैं या फिर आत्मविश्वास खो देती हैं। कोई भी मंजिल दूर नहीं होती, बस खुद के ऊपर कॉन्फिडेंस और हार से न डरने की काबिलियत होनी चाहिए। पहले एक समय था जब महिलाओं को चारदीवारी के अंदर ही रहने को कहा जाता था। आज मैरीकॉम जैसी महिलाएं देश का नाम रोशन कर रही हैं। इसका मतलब है कि उन्होंने दुनिया के तानों को न सुनकर बस अपने ड्रीम पर फोकस किया। राजधानी में कई गल्र्स हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में नया मुकाम पाया है और प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं।

चाय वाले की लड़की ने मैक्सिको में लहराया परचम
जिनका जीवन संघर्ष में गुजरता है वह तपकर एक दिन अपनी आभा से सबको चकाचौंध कर देते हैं। ऐसा ही कर दिखाया है राजातालाब की रहने वाली ज्योति जगत ने। ज्योति ने 13 नवंबर को मैक्सिको में आयोजित फुटबॉल वर्ल्ड कप में फस्र्ट रैंक हासिल करके देश का नाम गौरांवित किया है। ज्योति के पिता चेतन भगत की चाय की दुकान है, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने में उनकी मदद की। ज्योति को फुटबॉल खेलते हुए दस साल हो चुके हैं।

4 साल की उम्र में थाम लिया था रैकेट
कोई भी सपना अगर आप देखते हैं तो वह तभी पूरा हो सकता है जब आपके अंदर उस ड्रीम को पूरा करने की ललक हो। ऐसा ही कुछ कमाल किया है देवेंद्र नगर निवासी हीरल चौहान ने। हीरल नेशनल बैडमिंटन प्लेयर हैं और देश में अपना एक नाम हासिल कर चुकी हैं। हीरल बताती हैं कि उन्होंने चार साल की उम्र में पहली बार रैकेट पकड़ा था तब डिसाइड किया कि बैडमिंटन में अपना कॅरियर बनाऊंगी। हीरल अभी तक देश के कई शहरों में जैसे दिल्ली, बेंगलूरु, भोपाल, जयपुर आदि में अपने खेल का हुनर दिखा चुकी हैं।

बूढ़ातालाब से हंगरी तक सफर
पानी की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़कर नाम रोशन करना इतना आसान नहीं होता। यह तभी हो सकता है जब आप अपने ऊपर विश्वास करके आगे बढ़ोगे। ऐसी ही कहानी है आमापारा निवासी कौशल नंदिनी ठाकुर की। उन्होंने हाल ही में हंगरी वूडापेस्ट में आयोजित कयाकिंग प्रतियोगिता में 8वां स्थान पाकर देश का सिर ऊंचा किया है। वे बताती हैं कि उन्होंने 2010 में कयाकिंग की शुरुआत बूढ़ातालाब से शुरू की। उस समय पता नहीं था कि मैं इंडिया के लिए खेलूंगी, लेकिन मेरा सपना था कि कयाकिंग में नाम बनाऊं। वह ड्रीम मैने पूरा किया है।

कराते में महारत हासिल कर रहीं ठाकुर सिस्टर्स
राजधानी की गुंजन और शिवांगी ठाकुर कराते की नेशनल प्लेयर हैं और देश के कई शहरों में अपना हुनर दिखा चुकी हैं। गुंजन ने 6 साल की उम्र से कराते की प्रेक्टिस शुरू कर दी थी। उन लोगों का कहना है कि कराते के माध्यम से वे कॅरियर तो बनाएंगी ही, साथ महिलाओं को सेल्फ डिफेंस के बारे में भी जानना चाहिए। वे जनवरी में दिल्ली होने वाले नेशनल कॉम्पिटीशन के लिए चयन हुआ है।