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अधिकारी बोले- भालू रोज खाता था 5 किलो पपीता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भूख से मौत की पुष्टि

छत्तीसगढ़ के कानन पेंडारी जू में भालू की मौत का मामला सामने आया है। यहां वन अधिकारियों का कहना है कि भालू हर दिन पांच किलो पपीता खाता था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भालू की मौत भूख से होना बताया गया है। वन विभाग के प्रमुख सचिव को मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने पत्र लिखा है।

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अधिकारी बोले- भालू रोज खाता था 5 किलो पपीता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भूख से मौत की पुष्टि

अधिकारी बोले- भालू रोज खाता था 5 किलो पपीता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भूख से मौत की पुष्टि

रायपुर. बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी जू में दो महीने पहले भूख से एक भालू की मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे मामले को वन विभाग द्वारा छिपाकर रखा गया था। लेकिन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आते ही पूरे मामले का खुलासा हो गया। इसमें भालू की मौत भूख से होना बताया गया है, इधर वन अधिकारियों का कहना है कि भालू हर दिन पांच किलो पपीता खाता था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। इस संबंध में वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ को पीएम रिपोर्ट के साथ दस्तावेजी साक्ष्य भी भेजा है।बता दें कि रायगढ़ के खरसिया वनमंडल में ग्रामीण को घायल करने दो लोगों के मारने के बाद 21 दिसंबर 2019 को देवगांव से भालू को पकड़ा गया था। इसके लिए जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया था। इस दौरान भालू घायल हो गया था। उसे उपचार के लिए कानन पेंडारी जू लाया गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने उसे स्वस्थ बताते हुए 5 किलो पपीता और 2 किलो दूध रोजाना पीना बताया गया था। लेकिन, 25 दिसंबर को अचानक उसकी मौत हो गई थी। इसका पीएम कर उसका अंतिम संस्कार कानन पेंडारी जू कर दिया गया था।

वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं कराई
भालू की मौत के बाद पीएम करवाने के बाद निजी चिकित्सक के जरिए रिपोर्ट बनवाई गई। इस दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग भी नहीं कराई गई। जबकि नियमानुसार अनुसूची एक के तहत आने वाले वन्य प्राणी का पीएम करते समय वीडियोग्राफी कराया जाना जरूरी है। वन्य जीव प्रेमी ने आशंका जताई है कि पूरे मामले में पर्दा डालने और राज्य सरकार को गुमराह करने के लिए ही निजी चिकित्सक को बुलवाया गया था। वहीं 27 दिसंबर को रिपोर्ट तैयार करने के बाद भी इसे छिपाकर रखा गया था। सूचना अधिकार के तहत इसे मांगने पर 14 फरवरी 2020 को इसकी रिपोर्ट दी गई।

उपचार में लापरवाही का आरोप
वन्य जीव प्रेमी ने आरोप लगाया है कि भालू के उपचार में लापरवाही बरती गई है। घायल अवस्था में लाए जाने के बाद उसकी पर्याप्त देखरेख नहीं की गई। जबकि उसकी उम्र करीब 10-12 वर्ष थी और 50 किलो वजन था। कानन पेंडारी लाए जाने के बाद पिंजरा सहित भालू की फोटो प्रकाशित करवाई गई थी। इसमें भालू को स्वस्थ्य बताते हुए पपीता और दूध का सेवन करना बताया गया था।