25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Saawan 2023 : भक्ति की शक्ति, भोलेनाथ के ऐसे भक्त जिन्होंने महादेव के दर्शन के लिए की 19,000 KM की यात्रा, जंगल-झाड़ियों में गुजारीं रातें

Saawan 2023 : सावन का चौथा सोमवार 31 जुलाई को है। भगवान के दर्शन को मंदिरों में भीड़ उमड़ेगी। शहर में भोलेनाथ के एक भक्त ऐसे भी हैं जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए 19 हजार किलोमीटर पैदल ही चल पड़े।

2 min read
Google source verification
Saawan 2023 : भक्ति की शक्ति, भोलेनाथ के ऐसे भक्त जिन्होंने महादेव के दर्शन के लिए की 19,000 KM की यात्रा, जंगल-झाड़ियों में गुजारीं रातें

Saawan 2023 : भक्ति की शक्ति, भोलेनाथ के ऐसे भक्त जिन्होंने महादेव के दर्शन के लिए की 19,000 KM की यात्रा, जंगल-झाड़ियों में गुजारीं रातें

गौरव शर्मा @रायपुर. सावन का चौथा सोमवार 31 जुलाई को है। भगवान के दर्शन को मंदिरों में भीड़ उमड़ेगी। शहर में भोलेनाथ के एक भक्त ऐसे भी हैं जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए 19 हजार किलोमीटर पैदल ही चल पड़े। रास्ते में कहीं गालियां मिलीं। कहीं मार खाते-खाते बचे।

भोजन नहीं मिला तो पानी पीकर उपवास कर लिया। कभी खुले आसमान में तो कभी जंगल-झाड़ियों के बीच रातें गुजारीं। 16 महीने की यात्रा पूरी कर वे हाल ही में रायपुर लौटे हैं। हैरानी की बात तो ये है कि इतना पैदल चलने के बाद उनके पैरों में एक फोड़ा तक नहीं पड़ा है। भोले के इस भक्त का नाम नकुल महानंद है।

राठौर चौक में रहते हैं। बचपन से ही मंदिरों में सेवा देते आए हैं। इसलिए साईंराम नाम पड़ गया। पत्रिका से बातचीत में अपनी यात्रा के बारे में उन्होंने बताया, मार्च 2022 में मैंने यात्रा शुरू की थी। द्वादश ज्योतिर्लिंग की यात्रा से पहले गंगोत्री जाना जरूरी है। इसलिए सबसे पहले उत्तराखंड गया। फिर केदारनाथ से जो यात्रा शुरू हु.वह पिछले महीने ओंकारेश्वर के दर्शन के साथ संपन्न हुई। रास्ते में ढेरों परेशानियां आईं। एक-दो बार जान पर भी बन आई, लेकिन भोलेनाथ की कृपा से संकल्प पूरा हो गया।

चुनौतियां... पैसे 8 माह में खत्म हो गए


साईंराम ने जब यात्रा शुरू की तो जेब में 20 हजार थे। पीठ पर कपड़ों, स्टोव और राशन से भरा 30 किलो वजनी पोटली। इस बोझ के साथ वे हर दिन 40 किलोमीटर पैदल चलते थे। सारे पैसे 8 महीने में खत्म हो गए। इसके साथ संघर्ष भी बढ़ गया।

न रुकने को पैसे थे, न खाने को। ऐसे में कभी ओवरब्रिज तो कभी रेलवे और बस स्टैंड के नीचे रातें गुजारीं। जंगली इलाकों में पेड़ों के नीचे सोए। रास्ते के पड़ावों में कई श्रद्धावान ऐसे भी मिले जिन्होंने मदद के लिए पैसे, राशन समेत दूसरे जरूरी इंतजाम किए।

नवरात्रि में मां ने दिया था आदेश

साईं राम बताते हैं, मार्च 2022 में वे चैत्र नवरात्रि पर मां की साधना कर रहे थे। 9वें दिन का उपवास खत्म करने से पहले अंतर्मन में ये ख्याल आया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग की पैदल यात्रा करनी है। इसे उन्होंने मातारानी का आदेश मानते हुए नवरात्रि खत्म होने के अगले दिन ही यात्रा शुरू कर दी। वे कहते हैं कि इस यात्रा का उद्देश्य अपने धर्म, संस्कृति को जानने के साथ आध्यात्मिक ज्ञान हासिल करना था। इसमें वे सफल भी रहे।

ओडिशा में बच्चा चोर समझा

2022 के अंत में साईंराम झारखंड स्थित वैद्यनाथ से श्री शैलम दर्शन करने आंध्रप्रदेश के लिए निकले। रास्ते में ओडिशा पड़ा। साईंराम बताते हैं, उस वक्त ओडिशा में बच्चे चोरी होने का मामला गरम था। बच्चा चोरों के साधु जैसी वेशभूषा में घूमने की चर्चा थी। इसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ा। लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझ लिया। घेरकर गालियां दीं। यहां से निकले तो आंध्रप्रदेश बॉर्डर में भी यही माहौल। यहां तो जान पर बन आई जब लोगों ने मारने दौड़ाया। हालांकि भोले कृपा से बातचीत के बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।