
बेबी बंप के शेप से पता चलेगा लडक़ा होगा या लडक़ी, ये हैं प्रेग्नेंसी के 7 झूठ
एक बार आप प्रेग्नेंट हो गईं तो उसके बाद जो चीज सबसे ज्यादा आपको मिलती है वह है सलाह। जी हां, घरवालों से लेकर बाहर वाले तक हर कोई आपको कोई ना कोई सलाह देता मिल जाएगा। खाने-पीने से लेकर उठने-बैठने तक, हर कोई अपनी जानकारी और अनुभव आपके साथ साझा करता नजर आता है। लेकिन जरूरी नहीं कि आपको जितनी भी सलाह मिल रही है या फिर प्रेग्नेंसी से जुड़ी जो बातें आपको बतायी जा रही हैं वह सब सच हों। इनमें से कई बातें झूठी और गलतफहमी से भरी भी होती हैं। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं प्रेग्नेंसी से जुड़ी उन बातों के बारे में जो वैसे तो बेहद पॉप्युलर हैं लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है।
मिथक 1 : बेबी बंप का शेप बताता है लडक़ा होगा या लडक़ी
हकीकत : आपने भी अक्सर सुना होगा बहुत सी महिलाओं खासकर बुजुर्ग महिलाओं को ये कहते हुए कि अगर आपका बेबी बंप नीचे की तरफ झुका हुआ है तो लडक़ा होगा और अगर ऊपर की ओर उठा हुआ है तो लडक़ी होगी। लेकिन इस बात में कोई सच्चाई नहीं है क्योंकि बेबी बंप का शेप कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे- आपके पेट का आकार क्या है, पेट की मांसपेशियों कितनी स्ट्रॉन्ग हैं, गर्भाशय के अंदर बच्चा किस पोजिशन में है, यह आपकी पहली प्रेग्नेंसी है या नहीं आदि।
मिथक 2 : प्रेग्नेंट महिला के चेहरे का शेप और ग्लो बच्चे का जेंडर बताता है
हकीकत : सिर्फ बेबी बंप का शेप ही नहीं बल्कि बुजुर्ग महिलाएं तो प्रेग्नेंट महिला के चेहरे को देखकर भी दावा करती हैं कि लडक़ा होगा या लडक़ी। ऐसा कहा जाता है कि अगर होने वाली मां के चेहरे पर ज्यादा ग्लो यानी चमक है तो लडक़ी होगी और चमक नहीं है तो लडक़ा होगा। लेकिन चेहरे पर ग्लो और बच्चे के जेंडर के बीच कोई संबंध नहीं है क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड फ्लो बढ़ जाता है जिस वजह से चेहरे पर ग्लो दिखने लगता है। कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान डायट या फिर जेनेटिक्स की वजह से चेहरे पर मुंहासे आ जाते हैं। इन सबका बच्चे के जेंडर से कोई लेना देना नहीं है।
मिथक 3 : प्रेग्नेंट महिला के सीने में जलन हो तो बच्चे के सिर पर ढेर सारे बाल होंगे
हकीकत : आपने अक्सर लोगों को यह कहते सुना होगा कि अगर प्रेग्नेंट महिला को हार्ट बर्न हो तो इसका मतलब है कि बच्चे के सिर पर ढेर सारे बाल होंगे। प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत सी महिलाओं को हार्ट बर्न यानी सीने में जलन की दिक्कत होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान जैसे-जैसे बेबी बंप बढऩे लगता है, ऐसा फील होता है मानो पेट का खाना और ऐसिड, फूड पाइप की तरफ बढऩे लगता है जिससे सीने में जलन महसूस होने लगती है। लेकिन इस बात का होने वाले बच्चे के सिर पर बाल होने से कोई संबंध नहीं है।
मिथक 4 : प्रेग्नेंसी में एक्सर्साइज करने से बच्चे को नुकसान होगा
हकीकत : प्रेग्नेंसी में अक्सर महिलाओं को जितना हो सके आराम करने की सलाह दी जाती है। उन्हें कहा जाता है कि अगर वे प्रेग्नेंसी में एक्सर्साइज करेंगी तो इससे होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचेगा। लेकिन यह बात सच नहीं है। प्रेग्नेंसी के दौरान आप जितना ज्यादा ऐक्टिव रहेंगी, नॉर्मल डिलिवरी होने की संभावनाएं उतनी ही ज्यादा होंगी। लिहाजा प्रेग्नेंसी के दौरान हल्की-फुल्की एक्सर्साइज, योग आदि करने की सलाह डॉक्टर भी देते हैं। लेकिन किस तरह की एक्सर्साइज करनी है, प्रेग्नेंसी में कौन सी एक्सर्साइज सेफ है और कौन सी नहीं, इस बारे में अपने डॉक्टर से जरूर बात करें।
मिथक 5 : भ्रूण के हार्ट रेट से पता चलेगा बच्चे का जेंडर
हकीकत : होने वाला बच्चा लडक़ा होगा या लडक़ी इस बात को लेकर लोगों के मन में काफी उत्सुकता रहती है और शायद यही वजह है कि लोग बच्चे का जेंडर जानने के लिए अलग-अलग तरीके निकालते रहते हैं। ऐसी एक मान्यता है कि भ्रूण के हार्ट रेट से पता चल सकता है कि वह लडक़ा या लडक़ी। लेकिन यह बात भी सच नहीं है क्योंकि गर्भाशय के अंदर हर भ्रूण का हार्ट रेट औसतन 120 से 160 प्रति मिनट होता है। फिर चाहे वह लडक़ा हो या लडक़ी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।
मिथक 6 : प्रेग्नेंसी में हेयर डाई करने से मिसकैरेज का खतरा
हकीकत : ज्यादातर महिलाएं प्रेग्नेंसी के शुरुआती 12 हफ्तों में यानी प्रेग्नेंसी के 1 से 3 महीने के दौरान हेयर डाई करने से परहेज करती हैं। उन्हें लगता है कि इस दौरान हेयर डाई या हेयर कलर लगाने से बच्चे को नुकसान हो सकता है या मिसकैरेज का खतरा रहता है। लेकिन ऐसा नहीं क्योंकि रिसर्च में भी यह बात साबित हो चुकी है कि ज्यादातर हेयर डाई फिर चाहे वह पर्मानेंट हो या सेमी-पर्मानेंट उनमें पाया जाने वाला केमिकल प्रेग्नेंसी के दौरान यूज के लिए सेफ होता है।
मिथक 7 : प्रेग्नेंसी में हॉट वॉटर बाथ से बच्चे को हो सकता है नुकसान
हकीकत : प्रेग्नेंसी के दौरान गर्म पानी से नहाना, हॉट वॉटर बाथ लेना या सॉना बाथ लेने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन पानी का तापमान 102 डिग्री फैरनहाइट से ज्यादा नहीं होना चाहिए क्योंकि अगर पानी बहुत ज्यादा गर्म होगा तब प्रेग्नेंट महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जिससे मां और बच्चे दोनों को नुकसान हो सकता है।
Published on:
02 Mar 2020 09:11 pm
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