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छत्तीसगढ़ में कभी 15 दवा कंपनियां थीं, आज बना रहीं सेनिटाइजर, कॉटन और मॉस्क

छत्तीसगढ़ में राज्य गठन के दौरान दवा बनाने के कारोबार से जुड़ी 15 कंपनियां हुआ करती थीं। मगर, आज ऐलोपैथी दवा बनाने वाली एक भी कंपनी नहीं है। जो कंपनियां हैं वे सेनिटाइजर, कॉटन, बैंडेज और मॉस्क बना रही हैं।

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छत्तीसगढ़ में कभी 15 दवा कंपनियां थीं, आज बना रहीं सेनिटाइजर, कॉटन और मॉस्क

छत्तीसगढ़ में कभी 15 दवा कंपनियां थीं, आज बना रहीं सेनिटाइजर, कॉटन और मॉस्क

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य गठन के दौरान दवा बनाने के कारोबार से जुड़ी 15 कंपनियां हुआ करती थीं। मगर, आज ऐलोपैथी दवा बनाने वाली एक भी कंपनी नहीं है। जो कंपनियां हैं वे सेनिटाइजर, कॉटन, बैंडेज और मॉस्क बना रही हैं। इनमें भी चार कंपनियों को कोरोना महामारी आपातकाल में लाइसेंस जारी किए गए। ऐसे में रायपुर जिला दवा विक्रेता संघ के सचिव अश्वनी विग ने सभी दवा विक्रेताओं की तरफ से केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि प्रदेश में इस कारोबार को बढ़ावा देने के उचित प्रयास किए जाएं।
दवा विक्रेता संघ के सचिव अश्वनी विग ने बताया कि इन परिस्थितियों में आत्म निर्भरता की बात करना बेमानी होगा। अब सवाल यह है कि प्रदेश में स्थित निर्माण इकाईयाँ क्यों बंद हो गई? कहा जा रहा है कि नियमों में काफी सख्ती की गई है। बिलासपुर में हुए नसबंदी कांड के बाद तो और ज्यादा कड़ाई की गई। इस दौरान संचालित सभी कंपनियों की जांच हुई। ये मानकों पर नहीं पाई गई तो बंद करवा दिया गया। उधर, आयुर्वेदिक दवाओ के निर्माण की मध्य प्रदेश के समय लगभग 20 निर्माण इकाईया थीं, आज 10 बची हैं। अब जब आत्म निर्भर बनने की बात आ रही है तो मांग उठ रही है कि प्रदेश में दवा निर्माण के कारोबार को बढ़ावा दिया जाए।