ऋग्वेद में सूर्य को स्थावर जंगम की आत्मा कहा जाता है। अर्थात वैदिक युग से अब तक सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य एवं शक्ति के देवता के रूप में मान्यता है। छान्दोग्य उपनिषद में सूर्य को ब्रह्म कहा गया हैं। पुराणों में द्वादश आदित्यों, सूर्य की अनेक कथाएं प्रसिद्ध हैं, जिनमें उनका स्थान व महत्व वर्णित है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार नाम, राज्य और यश के चाहवान व्यक्ति को इस तरह का भोजन खाने और खिलाने से बड़े फायदे होते हैं।