
18 लाख रुपए में बनी फिल्म ने एक करोड़ से ज्यादा का किया था कारोबार ।
ताबीर हुसैन @ रायपुर.इस दिवाली मया-3 फ्लोर पर आएगी। जाहिर है मया-2 और मया भी आई है। आज हम मया यानी मया-1 से जुड़े रोचक तथ्य साझा कर रहे हैं। दरअसल, 2003 के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मों का चलन कम हो गया था। 2009 में मया ने इंडस्ट्री को फिर से जीवंत किया। लेखन और निर्देशन किया था सतीश जैन ने। प्रोड्यूसर थे प्रकाश अवस्थी और रॉकी दासवानी। इस फिल्म के साथ एक कंट्रोसर्वी हो गई। इस पर मिथून, जितेंद्र, पदमनी और जया प्रदा अभिनीत उस वक्त की सुपरहिट फिल्म स्वर्ग से सुंदर की हुबहू कॉपी के आरोप लगे। मेकर्स को मुंबई हाईकोर्ट के चक्कर काटने पड़े।
ऐसे पड़ी मया की नींव
रॉकी दासवानी ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया। मैं और प्रकाश गरियाबंद से हैं इसलिए दोस्ती थी। प्रकाश की फिल्म गजब दिन भईगे के प्रीमियम में जाने का मौका मिला। मैंने पहली बार कोई छत्तीसगढ़ी फिल्म पूरी देखी थी। तब मेरे मन में विचार आया कि हमें भी फिल्म बनानी चाहिए। प्रकाश और मैंने इस विचार को हकीकत में बदला। यह फिल्म लगभग 18 लाख रुपए में बनी जिसका बिजनेस एक करोड़ के पार गया। अपने आप मेें बड़ी हिट साबित हुई। इंडस्ट्री को मानों संजीवनी मिल गई। रॉकी ने कहा कि इसकी भी एक कहानी है। प्रकाश ने मुझे बताया था कि फिल्म 10 लाख रुपए में बन जाएगी। मुझे तो सतीशजी ने बताया कि रॉकी प्रकाश तुम्हें सही जानकारी नहीं दे रहा है। ये फिल्म 15 लाख में बन पाएगी। मैंने कहा ठीक है करेंगे। हालांकि बाद में 18 लाख रुपए तक खर्च हो गए।
बॉलीवुड की फिल्मों नहीं मिल रहे थे थिएटर
रॉकी के मुताबिक जब मया हिट हुई तो मुंबई के ट्रेड में चर्चे होने लगे। यहां के सिंगल स्क्रीन में मया का कब्जा था इसलिए बॉलीवुड की फिल्मों के लिए थिएटर खाली नहीं थे। किसी ने रिव्यू में लिख दिया कि यह तो स्वर्ग से सुंदर की कॉपी है। स्वर्ग से सुंदर के प्रोड्यूसर ए. कृष्णामूर्ति का बेटा श्याम टॉकीज मया देखने आया। हमारी फिल्म चल रही रही थी कि नोटिस आया। नोटिस में ट्रेन और श्याम सिनेमा का टिकट अटैच था। मैंने नोटिस को इग्नोर किया लेकिन फिर दूसरा नोटिस आ गया। जब-जब नोटिस आता पेज की संख्या बढ़ जाती।
हमारा वकील उनके वकील का चेला निकला
उस प्रोड्यूसर ने मिथुन व अन्य कलाकारों की तरफ से भी हस्ताक्षरयुक्त कागज नोटिस के साथ भेजने शुरू कर दिए। तब मैं गंभीर हुआ पहली बार हाई कोर्ट मुंबई पहुंचा। कुछ हेयरिंग के बाद हमें समझ आ गया कि समझौते के अलावा कोई चारा नहीं है। हैरत तब हुई जब पता चला कि मेरा वकील उनके वकील का चेला था। क्योंकि जब उनका वकील आया तो हमारा उनके पांव छूने लगा। लगभग 25 लाख रुपए हमने उन्हें दिए। हालांकि दूसरे पक्ष का भी काफी खर्च हो चुका था। रॉकी ने बताया कि समझौता यूं हुआ कि दोनों ने कोर्ट में आवेदन देकर अपना-अपना दावा वापिस ले लिया। वहां से निकलने के बाद मैं, सतीशजी और कृश्णामूर्ति का बेटा चाय पीने लगे। तभी वहां कृष्णामूर्ति भी पहंचे। कहने लगे कि सतीश भाई आप इतने साल मुंबई में काम किए हो। हम दोनों एक-दूसरे को जानते हैं फिर एक बार पूछ लेते कि यह फिल्म कर रहा हूं तो इतनी परेशानी नहीं हुई होती। इसके बाद रॉकी ने कृष्णामूर्ति से स्वर्ग से सुंदर के उडिय़ा में बनाने के लिखित राइट्स 25 हजार रुपए में खरीदे। हालांकि उडिय़ा में आज तक फिल्म नहीं बनाई।
फिल्म को लेकर कोई उम्मीद नहीं थी
फिल्म पूरी शूट हो गई थी लेकिन मुझे सफलता की कोई उम्मीद नहीं थी। मैं 10.30 श्याम टॉकीज पहुंच गया क्योंकि मेरी पहली फिल्म थी। वहां से मैंने प्रकाश को फोन लगाया। उस वक्त 20-25 लोग टिकट काउंटर पर थे। मैंने कहा कि यार प्रकाश कब आ रहे हो। यहां 20-25 लोग हैं। प्रकाश झेंप गया। बोला अभी से इतने लोग आ गए हैं। मैं भी बस पहुुंच रहा हूं। उसके आते तक 11 बज गए और दर्शकों की संख्या 70-75 हो गई। हम लोगों ने सतीश भैया को जब बताया कि इतने दर्शक कतार में हैं तो उन्हें भी सुखद आश्चर्य हुआ। दरअसल छत्तीसगढ़ी फिल्में चल नहीं रही थीं तो किसी को इतनी उम्मीद भी नहीं थी। वैसे भी सतीश भैया झन भूलो मां बाप बनाने के बाद घर से कम ही निकलते थे। फिल्म बनाने को लेकर उनमें इंट्रेस्ट भी नहीं था। प्रकाश ने उन्हें मनाया था। फिल्म इस कदर चलेगी किसी ने सोचा नहीं था। हम इतने नाउम्मीद थे कि सिर्फ चार टॉकीजों पर रिलीज किए थे। इसके बाद तो लगभग सभी सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज हुई।

Published on:
23 Sept 2022 11:56 pm
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