
दिव्यांगों के लिए नहीं यह शहर: सरकारी ऑफिस, बैंक, एटीएम व सार्वजनिक स्थानों पर नहीं रैंप, घुटनों, हाथों के बल सीढिय़ां चढ़ रहे
जांजगीर.चांपा. शासन व प्रशासन को दिव्यांगों की सुविधा का ख्याल सिर्फ दिन विशेष पर ही आता है। यही कारण है कि प्रशासन चुनाव के दौरान वोट डलवाने के लिए दिव्यांगों को मतदान केंद्र स्थल पर रैंप बनाने के आदेश संबंधितों को जारी कर देता है, लेकिन दिव्यांग पूरे साल भर कितने सरकारी कार्यालयों व सार्वजनिक स्थानों पर रैंप न होने से परेशान होता है, इसे कोई नहीं देखता है। दिव्यांगों के पहुंच से साहब बहुत दूर हैं। इधर सबसे बड़े कार्यालय कलेक्टोरेट में विकलांग घिसटते हुए सीढ़ी चढऩे के लिए मजबूर हैं। फिर भी जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं। जिला मुख्यालय के तमाम सरकारी कार्यालय, बैंकों और एटीएम को दिव्यांगों के लिए सुगम में बनाने की किसी भी तरह की कोई कोशिश नहीं की गई है, जबकि दिव्यांग अधिनियम 1995 के लागू होने के बाद भी धरातल पर दिव्यांगों को बाधा मुक्त वातावरण उपलब्ध नहीं हो पा सका है।
जब पत्रिका की टीम ने शहर के सबसे बड़े ऑफि स, कलेक्टोरेट, जिला अस्पताल, जिला पंचायत, मुख्य बैंकों व एटीएम का अवलोकन किया तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। अधिकांश दफ्तर सहित कलेक्टोरेट भी खुद पालन नहीं कर रहा है। इधर बैंक दिव्यांग अधिकार अधिनियम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भारत सरकार के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते दिखे। जमीन से लगभग 5 से 7 फीट की ऊंचाई पर बने इन बैंकों में प्रवेश के लिए दिव्यांगों के लिए रैंप की कोई व्यवस्था नहीं है। यह हाल जिले के नैला रोड एसबीआई, पीएनबी सहित अन्य निजी बैंकों का है। इससे साफ जाहिर होता है कि विश्व विकलांग दिवस पर ही शासन-प्रशासन को दिव्यांगों की याद आती है। इसके इलावा उनकी गंभीर समस्याओं की ओर किसी भी विभाग के अधिकारी का ध्यान नहीं है। यही कारण है कि जिले के बैंक के इलावा बहुत सारे सरकारी कार्यालयों द्वारा कहीं भी दिव्यांगों की सुविधा का ख्याल नहीं रखा गया है।
अग्निपरीक्षा से कम नहीं बस में सफ र करना
ऐसे में दिव्यांग को ट्राइसिकिल के साथ बस स्टैंड में जाने में बहुत परेशानी आती है। इसके बाद दिव्यांग की अग्निपरीक्षा बस में बैठने में होती है। खास बात यह है कि बस संचालकों द्वारा बसों में सीट के ऊपर तो दिव्यांगों के लिए आरक्षित सीट लिख दिया गया है लेकिन यह सीट उन्हें जरूरत के समय उपलब्ध नहीं होती है। वहीं बस ऑपरेटरों ने दिव्यांगों को बस में बैठने के लिए सुविधाजनक सीढिय़ां भी नहीं लगवाई है।
कलेक्टोरेट के सीढ़ी में चढ़ते-चढ़ते लुढक़ गया दिव्यांग
पत्रिका की टीम मंगलवार को जिला कलेक्टोरेट ऑफिस पहुंची थी। जहां मेन गेट में सीढ़ी के सहारे एक विकलांग घिसटते हुए उतर रहा था। इसी दौरान थोड़ा अनबैंलेस हुआ और वह गिरने लगा। हालांकि उसके परिजन ने उसे सहारा दिया। इस तरह की मार्मिक घटना कलेक्टोरेट में हर रोज दिखने को मिलती है। फिर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि कलेक्टोरेट में रैंप बना हुआ हैए लेकिन वह ताले में कैद है। रैंप वाले दरवाजा को ताला लगा दिया गया हैए उसमें आवाजाही स्पष्ट रूप से मनाही है।
रेलवे स्टेशन में भी ज्यादा परेशान होते हैं दिव्यांग
स्थानीय दिव्यांगों के समक्ष सबसे बड़ी परेशानी आवागमन की है। जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन पर चार प्लेटफार्म हैं। लेकिन प्लेटफार्म तीन या चार पर दिव्यांगों के आवागमन के लिए रैंप नहीं है और न ही लिफ्ट की सुविधा है। ऐसे में दिव्यांग प्लेटफार्म नंबर एक के अलावा अन्य प्लेटफ ार्म पर ट्रेन आने की स्थिति में नहीं बैठ पाते हैं। वहीं यदि कोई दिव्यांग ट्रेन से आते है और वह ट्रेन प्लेटफ ार्म नंबर एक के अलावा अन्य पर रुकती है तो उसके समक्ष गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।
सरकार की गाइड लाइन के तहत विशेष व्यवस्था जरूरी
दिव्यांगों की सुविधा का ख्याल रखते हुए शासन की स्पष्ट गाइड लाइन है कि दिव्यांगों को सडक़ पर चलने से लेकर सार्वजनिक स्थानों, सराकरी कार्यालयों में विशेष व्यवस्था की जाए ताकि उन्हें न तो लाइन में लगना पड़े और न ही उक्त स्थान तक पहुंचने में उसे परेशानी का सामना करना न पड़े। गाइड लाइन के तहत रेलवे स्टेशनए जिला अस्पताल, नगर पालिका सहित अन्य कार्यालयों में दिव्यांगों के लिए अलग से विडों की व्यवस्था किया जाना जरूरी है।
Published on:
18 May 2023 01:48 pm
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