रायपुर . मैं साइंस की स्टूडेंट थी लेकिन मुझे मेडिकल या इंजीनियरिंग में नहीं जाना था। सर्चिंग में क्लैट के बारे में पता चला। तबसे मुझे लॉ से लगाव हो गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि 10 गोल्ड मिलेंगे और न ही मैंने माक्र्स लाने के लिए पढ़ाई की। मैंने सब्जेक्ट को एंजॉय किया। कॉर्पोरेट मेरे लिए ठीक नहीं है। मैं ज्यूडिशियरी में जाना चाहूंगी। यह कहा हिदायतुल्ला लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत में 10 गोल्ड मेडल पाने वाली अनन्या मिश्रा ने। एक सवाल पर बोलीं- हां ये सही है कि जजेस के लिए ढेरसारी पाबंदियां होती हैं, बावजूद मैं ज्यूडिशियरी में ही जाना चाहूंगी क्योंकि पावर और प्रैस्टिज दोनों है। उन्होंने कहा कि आज फादर्स डे है। मैं अपने सारे गोल्ड पापा को डेडिकेट करना चाहूंगी क्योंकि उन्होंने मुझे फाइनेंशियल से लेकर मॉरल, मेंटल और इमोशनली सपोर्ट किया है। जब भी पढ़ाई को लेकर स्ट्रेस आता तो पापा कहते थे कि रोओ मत। एग्जाम देने लाइटली जाओ। जो होगा देखा जाएगा। अनन्या ने कहा कि मैं आज जो भी हूं पैरेंट्स की वजह से।