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तीन प्रेरक कहानियां जो सिखाएंगी आपको जीना और ख्वाब पूरे करना

वल्र्ड डे ऑफ सोशल जस्टिस: रिश्तेदार कहते थे जिंदगी खराब हो गई इस लड़की की, कुछ नहीं कर सकती, अब हैं इंटरनेशनल प्लेयर

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तीन प्रेरक कहानियां जो सिखाएंगी आपको जीना और ख्वाब पूरे करना

मुंबई की निशा गुप्ता, रायपुर की दामिनी सेन और कविता पाठक।

ताबीर हुसैन @ रायपुर. सपना था एयरहोस्टेस बनने का। जब 18 ईयर की थी तब छुट्टियां मनाने बनारस गईं थीं। पेड़ से आम तोड़ते वक्त पीठ के बल गिरीं और स्पाइनल कोर्ड इंन्जुरी का शिकार हो गईं। लगा मानो दुनिया खत्म। डॉक्टर ने साफ कह दिया था कि निशा तुम्हें जिंदगीभर अब व्हीलचेयर पर रही रहना होगा। डॉक्टर की बात से मैं उदास जरूर हुई लेकिन एक संकल्प भी लिया कि ये जिंदगी ऐसे ही नहीं बीतेगी। आज मैं न सिर्फ इंटरनेशनल बास्केटबॉल प्लेयर हूं बल्कि नेशनल में स्वीमिंग भी की है। यह कहना है मुंबई की निशा गुप्ता का। आज वल्र्ड डे ऑफ सोशल जस्टिस है। इसमें हम 3 ऐसी गल्र्स की कहानी शेयर कर रहे हैं जिन्होंने लोगों के ताने की परवाह नहीं की और खुद को साबित किया। इसमें निशा के अलावा रायपुर की कविता पाठक हैं जो बैंक ऑफ बड़ोदा में कार्यरत हैं। डागा गल्र्स कॉलेज में फाइनल की छात्रा दामिनी साहू हैं जो आकाशवाणी रायपुर के युववाणी कार्यक्रम की एनाउंसर हैं।

ऐसे बदला नजरिया

निशा ने बताया, हादसे के बाद 4 साल तक घर पर रहना पड़ा। कभी तो ऐसा भी लगता कि अब जीने का कोई मतलब नहीं। हर लड़की तरह मेरे भी सपने थे जिसे मैं पूरे करना चाहती थी। भले ही मैं एयरहोस्टेस न बन पाऊं लेकिन खुद को इस तरह घुट-घुटकर मरना गवारा नहीं था। इसलिए मैंने तय किया कि कुछ न कुछ करूंगी। स्पाइनल कोर्ड अवेयनेस डे पर इवेंट में जाने का मौका मिला। वहां मैंने देखा कि मेरे जैसे हजारों लोग थे वहां। मैं शॉक्ड हो गई। हादसे के बाद पहली बार घर से निकली थी। यह देखकर मुझे लगा मै अकेली नहीं हूं इस दुनिया में। वहां मैंने कई लोगों को डांस करते हुए देखा। तबसे मेरा नजरिया बदल गया। अब तक तो मैं यही समझती थी मैं ही एकमात्र अभागी हूं। सुरेशा कार्की लोगों का साथ मिला जिन्होंने मुझे पैरा बास्केटबॉल और पैरा स्वीमिंग सिखाने में हेल्प की। हालांकि ये अपनेआप में मेरे लिए चुनौती से कम नहीं था लेकिन स्वीमिंग में नेशनल और बास्केटबॉल में इंटरनेशनल खेल रही हूं।

दोनों हाथ नहीं, पैरों से लिखती हैं दामिनी; छत्तीसगढ़ी युववाणी में करती हैं कंपीयरिंग

दामिनी सेन के दोनों हाथ नहीं हैं लेकिन उसे इस बात का मलाल नहीं है। क्योंकि उन्होंने खुद को चुनौती मानते हुए वह हर काम के लायक बनाया जो नॉर्मल लोग कर सकते हैं। दामिनी इस साल ग्रेजुएट हो जाएंगी। बचपन में दाखिले के वक्त टीचर ने कहा था ये कैसे लिख पाएंगी, वक्त ऐसा आया कि दामिनी की हैंडराइटिंग की तारीफ प्रधानमंत्री मोदी कर चुके हैं। दामिनी आकाशवाणी रायपुर के कार्यक्रम युववाणी में केजुअल एनाउंसर हैं। दामिनी मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। वे छत्तीसगढ़ी युववाणी पेश करती हैं। उनका अगला कार्यक्रम 17 मार्च को है। अगर आप उन्हें सुनना चाहते हैं तो 17 मार्च शाम 5 बजकर 5 मिनट पर आकाशवाणी रायपुर सुनिए। अब आकाशवाणी रायपुर ऑनलाइन भी अवलेबल है। इसके लिए आपको गूगल प्ले पर जाकर न्यूजऑनएआईआर ऐप लोड करना होगा जो कि फ्री है।

एडमिशन के लिए खाईं ठोकरें, आज सरकारी बैंक में जॉब

कविता पाठक सरकारी बैंक में जॉब कर रही हैं। यहां तक पहुंचना आसान जरा भी नहीं था। सेरेब्रल पाल्सी बीमारी से पीडि़त होने के कारण स्कूलों में दाखिला नहीं मिलता था। हर जगह से न सुनने से कविता के पैरेंट्स दुखी जरूर थे लेकिन कोशिश जारी रखी। किसी तरह स्कूल में एडमिशन मिला। इसके बाद पढ़ाई तो शुरू हो गई लेकिन कई तरह की दिक्कत से आगे बढ़ते हुए कविता ने पीजी के बाद नौकरी के लिए प्रयास शुरू किया। अच्छे राइटर न मिलने के कारण सबकुछ पता होने के बाद भी पेपर सही बन नहीं पाता था। आखिर कविता का संघर्ष खत्म हुआ और वे बैंक में जॉब कर रही हैं। वे कहती हैं कि मुझे आगे बढ़ाने में दिव्यांगों के लिए कार्यरत संस्था कोपलवाणी की भी भूमिका है। पदमा ठाकुर मैडम ने मुझे संबल दिया और आगे बढ़ाने में मदद की।


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