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Tiger In CG : तीन दशक बाद इन इलाकों में दिखा बाघ, सुरक्षा के लिए वन विभाग ने लगाया ट्रैक कैमरा

Tiger In CG : राजधानी रायपुर से लगभग 90 किलोमीटर दूर सिरपुर क्षेत्र में करीब तीन दशक बाद बाघ देखे जाने के बाद वन विभाग में एक ओर खुशी का माहौल है तो दूसरी ओर बाघ व ग्रामीणों की सुरक्षा की चुनौती भी है।

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Tiger In Chhattisgarh : राजधानी रायपुर से लगभग 90 किलोमीटर दूर सिरपुर क्षेत्र में करीब तीन दशक बाद बाघ देखे जाने के बाद वन विभाग में एक ओर खुशी का माहौल है तो दूसरी ओर बाघ व ग्रामीणों की सुरक्षा की चुनौती भी है। इसे लेकर वन अमले को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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सिरपुर छपोराडीह मार्ग में गुरुवार को एक बाघ को सड़क पार करते देख वहां से कार से गुजर रहे शिक्षक काशीराम पटेल ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया। यह वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुआ। वन अधिकारियों ने भी उस क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है। साथ ही वन विभाग के आला अधिकारियों ने महासमुंद, उदंती टाइगर रिजर्व, बारनवापारा वनमंडल के अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक कर बाघ व ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चर्चा की। वहीं सिरपुर से लगे गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

बाघ की मौजूदगी को लेकर गांवों में मुनादी भी कराई गई है। महासमुंद वन विभाग ने बाघ के विचरण क्षेत्र में ट्रैकिंग कैमरे लगाने का फैसला किया है, ताकि उसकी गतिविधियों की निगरानी की जा सके। इसके साथ ही बाघ का वीडियो बनाकर स्थान का नाम बताने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके अतिरिक्त बाघ जिस क्षेत्र में रहते है, वहां आसपास के खेतों व घरों का बिजली सप्लाई बंद कर दिया जाता है, ताकि किसी भी प्रकार से बाघ को नुकसान न हो।


70 के दशक में थे 25 से 30 बाघ

1970 के दशक में बारनवापारा क्षेत्र 25 से 30 बाघ हुआ करते थे, किंतु इस इलाके में इंसानी बस्तियों के तेजी से बढ़ने के कारण जानवरों की संख्या कम हो गई। करीब 2000 में राज्य बनने के बाद इस क्षेत्र में बाघ नहीं दिखा। 2011 में अंतिम बार गणना के दौरान बारनवापारा अभयारण्य में बाघ रिपोर्ट हुआ था। मध्यप्रदेश के जंगल से 4 बाघों का जोड़ा लाने की योजना है, लेकिन अभी ग्रामीणों से चर्चा नहीं हो पाई है।

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लौटकर आया और किया गाय का शिकार

ग्रामीण से मिली जानकारी अनुसार बाघ शुक्रवार शाम को बारनवापारा अभयारण्य की तरफ चला गया था, लेकिन सुबह होते ही सिरपुर क्षेत्र में लौटकर एक गाय को अपना शिकार बनाया। वहीं रविवार रात में बाघ द्वारा सुकुलबाय में एक बछड़े का शिकार कर अम्लोर के घने जंगल में चला गया। आसपास के लोगों ने दिनभर बाघ की दहाड़ सुनी, जिसके कारण वे लोग घर में ही रहे। वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर मवेशी मालिक से मुलाकात कर मुआवजा दिया। हालांकि जिस क्षेत्र में बाघ ने गाय का शिकार किया है, उस क्षेत्र में बायसन, हिरण व नीलगाय बड़ी संख्या में है। बाघ शनिवार शाम को जंगल के रास्ते में चल रहा था, जिसे मोटरसाइकिल दंपती ने देखा।


राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा के लिए मुनादी

बाघ और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिहाज से कोटवार व वन विभाग के सुरक्षाकर्मी पीढ़ी, मोहकम, खडसा, खिरसाली सेनकपाट, अचनाकपुर, सिरपुर, रायतुम, सुकुलबाय, तालाझार, बोरिद, पासीद, अमलोर छताल आदि गांवों में मुनादी कर रहे हैं।



बाघ के सुरक्षा को लेकर लगातार बाघ पर वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व ग्राम प्रमुख निगरानी कर रहे हैं। बाघ और ग्रामीणों की सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं के लिए महासमुंद और बलौदाबाजार को 4.32 लाख रूपए तत्काल दिए गए हैं। इसके साथ ही एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ संजीता गुप्ता को संबंधित क्षेत्र में भेजा गया है।
- सुधीर अग्रवाल, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ, छत्तीसगढ़