सरकारी कार्यक्रम हमर पहुना में हुए शामिल
ताबीर हुसैन @ रायपुर. मैंने तो कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) देखी नहीं है लेकिन घृणा फैलाने के लिए कुछ भी किया जाए यह गलत है। निगेटिव बातें घर ज्यादा करती हैं। इससे मुझे डर है कि ट्रेंड खराब होगा। प्रोड्यूसर कहेगा ऐसी फिल्में बननी चाहिए। यह कहना है डायरेक्टर और एक्टर तिग्मांशु धुलिया (Tigmanshu Dhulia) का। वे संस्कृति विभाग की ओर से मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित हमर पहुना कार्यक्रम में बोल रहे थे। विषय था- सिनेमा के सतरंगी आसमान पर छत्तीसगढ़ का भविष्य और संभावनाएं। इस पर कहा कि यहां के फिल्मकारों को हिंदी में फिल्में बनानी चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। हिंदी फिल्म इन छत्तीसगढ़ टैंग से आगे बढ़ा जा सकता है। आप जमीनी हकीकत कहें लेकिन हिंदी में। रीजनल से बाहर आने की जरूरत है। कोई कैसे 25 लाख में फिल्म बना सकता है और क्या दिखा देगा। इसलिए जरूरी है पैन इंडिया की ओर बढ़ा जाए। आगे कहा कि कल्चर को आप पॉलिटिक्स से अलग नहीं कर सकते। क्योंकि आर्ट वहीं से निकलकर आता है। इसके लिए अध्ययन की जरूरत है। आपके आसपास क्या कुछ चल रहा है इसकी जानकारी होनी चाहिए।
फ्रीडम के चलते आया इस फील्ड में
मैं 11वीं से थिएटर कर रहा हूं। 10 से 12 अच्छे नाटक उसी दौरान कर लिए थे। 19 की उम्र में गिटार लेकर एनएसडी पहुंच गया था। वहां देखा कि लड़के-लड़कियां रात के 10 बजे घूम रहे हैं। इरफान को घूमते देखा। रात हो गई लेकिन उन्हें घर से कोई बुला नहीं रहा। ये फ्रीडम मुझे अच्छी लगी और मैं इस फील्ड के लिए अट्रेक्ट हो गया। 22 साल में मैं एनएसडी से पास हो गया हालांकि मैं थिएटर ज्यादा नहीं किए। मेरे घर में मुझसे ज्यादा मेरे पैरेंट्स फिल्में देखते थे। हर चीज अलाउ थी।
मैं अच्छा एक्टर नहीं
गैंग्स ऑफ वासेपुर (Gangs of Wasseypur) के संस्मरण पर कहा कि मैं 20 साल बाद एक्टिंग कर रहा था। मुझे उस वक्त ये भी नहीं पता था कि 75 साल के बुजुर्ग का रोल करना है। जो भी हुआ कॉन्फिडेंस के चलते हुआ वर्ना मैं खुद को अच्छा एक्टर नहीं मानता। इस फिल्म में आपका डायलॉग है कि तुमसे नहीं हो पाएगा। आपका कभी ऐसा अनुभव रहा? इस सवाल पर धुलिया ने कहा कि आप डरे हुए हों तो काम अच्छा होता है। वैसे भी कन्फ्यूजन या डर अच्छी चीज है। यही आपको आगे बढ़ाती है।