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GST बिल नहीं मांग कर आप हो रहे लूट का शिकार, जानिए कारोबारी इसका कैसे उठाते है फायदा

राजधानी के कई बड़े-छोटे दुकानदारों जीएसटी बिल ग्राहकों का नहीं दिया जा रहा है ।
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रायपुर

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Chandu Nirmalkar

•

Updated: 30 Sep 2018, 6:52 PM IST

GST bill

GST बिल नहीं मांग कर आप हो रहे लूट का शिकार, जानिए कारोबारी इसका कैसे उठाते है फायदा

अजय रघुवंशी@रायपुर. जीएसटी लागू होने के बाद राज्य कर (वाणिज्यिक कर) विभाग के अधिकारी ऑनलाइन रिटर्न में गलती पकड़कर टैक्स चोरी पकडऩे में लगे हुए हैं, जबकि शहर में कई ऐसे मामले हैं, जिसमें टैक्स चोरी की आशंका बढ़ती ही जा रही है। राजधानी के कई बड़े-छोटे दुकानदारों जीएसटी बिल ग्राहकों का नहीं दिया जा रहा है ।

नियमानुसार मुताबिक 200 रुपए से अधिक की खरीदारी पर जीएसटी बिल देना अनिवार्य है, लेकिन राजधानी के प्रमुख बाजारों में कभी कम्प्यूटर खराब होने तो कभी कच्चा बिल के नाम पर जीएसटी बिल नहीं दिया जाता है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2017 से जीएसटी को लागू किया है, लेकिन बिल का अधिकार लागू नहीं हो पाया है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जीएसटी लागू होने के बाद फर्जीवाड़ा की संभावना कम है, लेकिन ई-वे बिल और सस्ते सॉफ्टवेयर के जरिए शहर में ही लाखों रुपए के टैक्स चोरी का नए पैतरे सामने आ चुके है।

त्योहारी सीजन में टैक्स चोरी का खेल
जीएसटी लागू होने के बाद पहले त्योहारी सीजन में विभाग ने टैक्स चोरी का कोई नया मामला नहीं पकड़ा। जीएसटी लागू होने के बाद विभाग ने ई-वे बिल पर मामला जरूर दर्ज किया गया, लेकिन अब यह भी खानापूर्ति ही है। विभाग के इनफोर्समेंट टीम ने जीएसटी लागू होने के बाद गिनती की कार्यवाही की है। इसकी संख्या 10 से कम है। साथ ही किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।

व्यवसाय स्थल पर गायब है बोर्ड
जीएसटी रजिस्टर्ड डीलर्स को अपने दुकानों पर जीएसटीएन नंबर स्पष्ट रूप से उल्लेख करना है। यदि वह कंपोजिशन के दायरे के भीतर आने पर इसका भी प्रस्तुतिकरण जरूरी है। राजधानी के 50 से 70 फीसदी दुकानों के बोर्ड नहीं बदले गए हैं, इसमें जीएसटीएन नंबर नहीं लिखा गया है।

खरीदी के बाद बता रहे लगेगा जीएसटी
बाजार में ग्राहक धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं, जिसमें कई बार ग्राहकों को यह कहा जाता है कि जीएसटी बिल लेने पर कीमत बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में ग्राहक ों को बिना जीएसटी बिल के सामानों को लेने की मजबूरी बन चुकी है। पैकेट बंद वस्तुओं में जीएसटी शामिल हैं, लेकिन कपड़ा, फैंसी, लाइफ स्टाइल के कई ऐसे सामान जिसमें प्रिंट होने के बाद भी जीएसटी के नाम पर रेट बढ़ाने का खौफ दिखाया जाता है।

टोल फ्री नंबर बंद
विभाग का टोल फ्री नंबर 1800-233-5382 में फोन करने पर कोई जवाब नहीं आ रहा है। ग्राहकों की शिकायत है कि यह नंबर आमतौर पर लगता नहीं है। विभाग के जीएसटी हेल्प डेस्क में भी शिकायत का असर नहीं हो रहा है।

विभाग की नजर छोटे डीलर्स पर नहीं है, बल्कि उन बड़े डीलर्स पर है, जिनका टर्नओवर करोड़ों में है। विभाग के विभागीय सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों को लगता है कि बड़े डीलर्स ही टैक्स की चोरी कर रहे हैं, लेकिन बीते दिनों राजधानी में सॉफ्टवेयर के जरिए टैक्स चोरी के मामले के खुलासे के बाद अधिकारियों की यह बात झूठी साबित हो चुकी है, क्योंकि मालवीय रोड स्थित छोटे से बर्तन दुकान में 25 लाख से अधिक टैक्स चोरी का मामला पकड़ मेंं आया था। वह भी शिकायत के बाद।

20 लाख रुपए या इससे कम वार्षिक टर्नओवर वाले कारोबारियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। 20 लाख रुपए से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। दुकानदारों को सभी तरह की खरीदी पर बिल देना अनिवार्य है। पी. संगीता, आयुक्त, राज्य कर विभाग