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धमतरी: 26 करोड़ खर्च कर युवा बने हुनरमंद, फिर भी बेरोजगार

विडंबना यह है कि इसमें से सिर्फ 9 हजार युवाओं का प्लेसमेंट किया जा सका है।
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CG News

पढ़े-लिखे हैं और आप बेरोजगार हैं तो जानिए दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत मिलने वाली इस योजना को

धमतरी. हाथ में हुनर होने के बाद भी जिले के 11 हजार युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। वीटीपी सेंटरों ने आज तक उनके प्लेसमेंट की व्यवस्था नहीं की गई है। विडंबना यह है कि 9 हजार युवाओं का प्लेसमेंट किया गया है, इसमें से भी अधिकांश को नौकरी रास नहीं आई और वे घर लौट आए हैं।

युवाओं के हुनर को निखारने और उन्हें नौकरी के अवसर देने के लिए शासन द्वारा कौशल विकास योजना चलाई जा रही है। इसके तहत युवाओं को विभिन्न टे्रडों में 550 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है। यह योजना 2013 से शुरू है, तब से लेकर आज तक करीब 26 करोड़ रुपए का खर्च कर 20 हजार युवाओं को हुनरमंद बनाया गया है। विडंबना यह है कि इसमें से सिर्फ 9 हजार युवाओं का प्लेसमेंट किया जा सका है। बाकी के 11 हजार युवा आज भी नौकरी की तलाश में दर-दर की ठोकर खा रहे हैं।

कौशल विकास प्रशिक्षण लेकर भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। कई बार प्लेसमेंट के लिए वीटीपी सेंटर का चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन नौकरी नहीं मिली है।
मयंक निर्मलकर, युवा

कौशल विकास के नाम पर वीटीपी सेंटर कमाई कर रहे हैं। युवाओं के हाथों में हुनर होने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं दी जा रही है।
मुकेश साहू, युवा

शर्तों में उलझ गए युवा
प्लेसमेंट एजेंसी के नियम और शर्ते युवाओं को भारी पडऩे लगे हैं। एक तो ले देकर नौकरी मिलती है उसके बाद कुछ ऐसी स्थिति पैदा कर दी जाती है कि वे ज्यादा दिन तक नौकरी पर नहीं टिक पाते हैं। और तो और कुछ लोग 8-10 हजार के वेतन पर बाहर जाकर नौकरी भी नहीं करना चाहते।

सिर्फ हुआ टाइमपास
युवा खिलेंद्र साहू, चंद्रपाल साहू ने बताया कि तीन माह तक उन्होंने कम्प्यूटर की ट्रेनिंग लेने के बाद भी उनका हुनर काम नहीं आ रहा। वीटीपी सेंटर द्वारा ट्रेनिंग के एवज में करीब 12 हजार स्कालरशीप देने का वादा किया गया था, लेकिन यह रकम भी नहीं दी गई।

कौशल विकास के तहत अब नियमों में बदलाव किया गया है, इसके तहत एजेंसियों को प्लेसमेंट के आधार पर भुगतान किया जाएगा। इससे युवाओं को अवसर ज्यादा प्राप्त होंगे।
डॉ शैलेंद्र गुप्ता,उपसंचालक कौशल विकास

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