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बेमौसम बारिश : 23 लाख 85 हजार 548 क्विंंटल से अधिक धान केवल कैपकवर के भरोसे

बुधवार सुबह से ही फिर से एक बार खराब मौसम ने बलौदाबाजार जिले में दस्तक दी है। बुधवार सुबह से ही क्षेत्र में बदली थी जिसके बाद लोगों को बीते दिनों के जैसे बदली बारिश का अंदेशा होने लगा था। मौसम विभाग की अलर्ट के बाद जिले में बुधवार रात ढाई से तीन बजे के बीच बारिश हुई। बारिश ने एक बार फिर से समितियों में धान को सुरक्षित रखने के दावों की पोल खोल कर रख दी।

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बेमौसम बारिश : 23 लाख 85 हजार 548 क्विंंटल से अधिक धान केवल कैपकवर के भरोसे

बेमौसम बारिश : 23 लाख 85 हजार 548 क्विंंटल से अधिक धान केवल कैपकवर के भरोसे

इस वर्ष खरीफ धान की जोरदार फसल होने के बावजूद किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धान की बंपर पैदावार होने के बाद धान को उपार्जन केन्द्रों तक लाने तथा बेचने के लिए किसानों को बेहद परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, धान खरीदी प्रारंभ होने के बाद फिर से एक बार बुधवार रात बलौदा बाजार समेत जिले के लगभग सभी स्थानों पर जोरदार बारिश हुई। जिससे धान को तगड़ा नुकसान पहुंचा है। बुधवार रात हुई बारिश की वजह से फिर से एक बार जहां समितियों में कैपकवर के भरोसे रखे धान के भीगने का अंदेशा है। वहीं सब्जी समेत रबी की फसल के लिए भी बारिश आफत की बारिश साबित हुई है। जिसकी वजह से किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है।

विदित हो कि बुधवार सुबह से ही फिर से एक बार खराब मौसम ने बलौदाबाजार जिले में दस्तक दी है। बुधवार सुबह से ही क्षेत्र में बदली थी जिसके बाद लोगों को बीते दिनों के जैसे बदली बारिश का अंदेशा होने लगा था। मौसम विभाग की अलर्ट के बाद जिले में बुधवार रात ढाई से तीन बजे के बीच बारिश हुई। बारिश ने एक बार फिर से समितियों में धान को सुरक्षित रखने के दावों की पोल खोल कर रख दी। जिले में अब तक 73 लाख 14 हजार 456 क्विंटल धान की खरीदी हुई है, जिसमें से अब तक 49 लाख 28 हजार 907 क्विंटल धान का परिवहन हुआ है तथा अब भी लगभग 23 लाख 85 हजार 548 क्विंटल से अधिक धान परिवहन के अभाव में उपार्जन केन्द्रों में ही रखा हुआ है, जो पूरी तरह से केवल कैपकवर के ही भरोसे है। जिले में धान की खरीदी की तुलना में धान का उठाव काफी धीमा है तथा जिला प्रशासन के बार बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक महज 67 प्रतिशत ही परिवहन हुआ है जो काफी कमजोर है। परिवहन ना होने की वजह से अधिकांश उपार्जन केन्द्रों में धान रखने की जगह नहीं है। उपार्जन केन्द्रों में भी जिला प्रशासन के निर्देश पर धान को सुरक्षित रखने के लिए कैपकवर के इंतजाम किए गए हैं, परंतु धान की बंपर मात्रा, बेहद कमजोर परिवहन तथा सीजन में बार बार हो रही बारिश की वजह से सारे इंतजाम अब फेल नजर आने लगे हैं।

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