रायपुर. शहर के आबाद तालाब अब बर्बाद हो रहे हैं। सुंदरता बढ़ाने के नाम पर तालाबों का दायरा घटाया जा रहा है। सौंदर्यीकरण की आड़ में तालाबों का दम घोटा जा रहा है। इसके लिए स्मार्ट सिटी ने करोड़ों का ठेका जारी किया है। कई तालाब पहले ही अंधे विकास की भेंट चढ़ चुके। अब बारी डगनिया के डबरी तालाब की है। यहां पाथ-वे बनाने के लिए तालाब का कैचमेंट एरिया पाटा जा रहा है। पहले मौजूद बाउंड्रीवॉल के पैरेलल एक और पक्का निर्माण किया जा रहा है। बताया जाता है कि इस पर पाथवे का निर्माण होगा।
गर्मी की वजह से फिलहाल पूरा तालाब डबरी सूख गया है। ऐसे में स्मार्ट सिटी तालाब के 7 से 10 मीटर भीतर तक कब्जा कर पक्का निर्माण करवा रही है। बताया जा रहा है कि पाथ-वे बनने से यहां लोगों को मॉर्निंग-इवनिंग वॉक की सुविधा मिलेगी। लेकिन, जिम्मेदार ये भूल गए हैं कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने छोटे वेटलैंड्स को भी संरक्षित करने के आदेश दिए हैं। राज्य में अब तक छोटे वेटलैंड्स को नोटिफाई नहीं किया जा सका है। लेकिन, इसका ये मतलब भी नहीं कि अधिसूचना आते तक इन तालाबों को ही खत्म कर दिया जाए।
1929 में राजकुमार कॉलेज के छात्रों ने खुदवाया था डबरी तालाब
डंगनिया का डबरी तालाब 94 साल पुराना है। साल 1929 में राजकुमार कॉलेज के छात्रों ने सामाजिक कार्य के तहत इसकी खुदाई करवाई थी। इलाके के जानकार बताते हैं कि महज 30 सालों में ही तालाब का 15 से 20 फीसदी हिस्सा पट चुका है। जबकि, बुजुर्गों का दावा है कि 94 सालों में तालाब का 30 से 40 फीसदी हिस्सा पट चुका है। इस बार तालाब पाटने का ठेका स्मार्ट सिटी ने लिया है।
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फिलहाल मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। आपने बताया है तो संबंधित अफसरों से जानकारी लेता हूं। किसी काम से अगर वेटलैंड्स प्रभावित हो रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारी को कार्रवाई के लिए लिखेंगे।
– विश्वेश कुमार, डीएफओ, सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड अथाॅरिटी