11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

पेन अमेरिकन लिटरेरी अवॉर्ड से नवाजे जाएंगे साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल, पहले भारतीय जिन्हें मिलेगा यह सम्मान

Vinod Kumar Shukla: विनोद कुमार शुक्ल(Vinod Kumar Shukla) के साथ ही सुप्रसिद्ध नाटककार एरिका डिकर्सन डेस्पेंज़ा को पेन लौरा पेल्स इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर थियेटर पुरस्कार की घोषणा की गई है। एरिका डिकर्सन चरम वामपंथी नाटककार मानी जाती हैं।

2 min read
Google source verification
पेन अमेरिकन लिटरेरी अवॉर्ड

साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल

Writer Vinod Kumar Shukla: विश्व के सर्वोच्च सम्मान पेन अमेरिका व्लादिमीर नाबाकोव अवार्ड फॉर अचीवमेंट इन इंटरनेशनल लिटरेचर’ (Pen American Literary Award) से लेखक विनोद कुमार शुक्ल सम्मानित किए जाएंगे। वे पहले भारतीय एशियाई मूल के लेखक हैं जिन्हें इस सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस पुरस्कार में विनोद कुमार शुक्ल जी को 50 हजार डॉलर की राशि प्रदान की जाएगी जो भारतीय मुद्रा में 41 लाख रुपए की राशि होगी।

विनोद कुमार शुक्ल(Vinod Kumar Shukla) के साथ ही सुप्रसिद्ध नाटककार एरिका डिकर्सन डेस्पेंज़ा को पेन लौरा पेल्स इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर थियेटर पुरस्कार की घोषणा की गई है। एरिका डिकर्सन चरम वामपंथी नाटककार मानी जाती हैं। शिकागो निवासी एरिका डिकर्सन-डेस्पेंज़ा नारीवादी कवि-नाटककार और शिक्षिका हैं।दुनिया के सर्वोच्च सम्मानों से एक पेन अमेरिका व्लादिमीर नाबाकोव सम्मान पिछले साल सुप्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक न्गुगी वा थिओन्गो को प्रदान किया गया था।

यह भी पढ़ें: छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाकर छेड़छाड़ करते थे टीचर्स, पुलिस ने तीन शिक्षकों को किया गिरफ्तार

उपन्यासकार और एक बहुत अच्छे कवि भी
विनोद कुमार शुक्ल(Writer Vinod Kumar Shukla) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य में कई कविताएं और किताबें लिखी हैं। एक उपन्यासकार होने के साथ-साथ विनोद कुमार बहुत अच्छे कवि भी हैं। गद्य और पद्य दोनों में पंडित विनोद कुमार शुक्ल की कोई सानी नहीं है। कुछ दिनों पहले ही पंडित विनोद कुमार शुक्ल ने फेसबुक लाइव सेशन के दौरान यह बताया था कि वह किस तरह से लेखन करते हैं।

चंद लाइनें लिखने के बाद आकार लेने लगते हैं शब्द
पंडित विनोद कुमार शुक्ल (Writer Vinod Kumar Shukla)के अनुसार, "जब वह सोचते हैं कि क्या लिखना है, तो उनके दिमाग में एक देखा हुआ पक्षी पिंजड़े में आ जाता है और मैं लिख कर उस पिंजड़े में आए पक्षी को पिंजड़े का दरवाजा खोल कर स्वतंत्र करने की कोशिश करता हूं. इसीलिए लिखता हूं।''

पंडित विनोद कुमार शुक्ल(Writer Vinod Kumar Shukla) के लिए लेखन लोगों से बात करने का एक जरिया है। कई बार तो वे अपने लेखन के बार में खुद ही नहीं जानते कि वो आखिर लिखना क्या चाहते हैं। मगर कुछ लाइनें लिखने के बाद उनके ये शब्द आकार लेने लगते हैं। इसके बाद विषय अपने आप दिमाग में छपने लगता है।