
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में आने वाले समय में हवा के जरिए फैलने वाले खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया की जांच हो सकेगी। इसके लिए यहां बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) लैब की स्थापना की तैयारी चल रही है। बीते महीने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एम्स का निरीक्षण भी किया है।
डायरेक्टर डॉ. नितिन एम. नागरकर ने बताया, लैब काफी एडंवास रहेगा। इसमें कई तहत की टेस्ट होगी। अभी जीनोम सिक्वेसिंग की स्टडी हो रही है। बीएचएल-3 लैब के बन जाने से इसके अलावा जटिल से जटिल वायरस की भी स्टडी होने लगेगी। आईसीएमआर को प्रपोजल बनाकर दिया गया है। आने वाले एक-दो हफ्ते इसे आगे बढ़ाया जाएगा। बता दें कि देश में इस तरह के 15 से भी कम लैब है।
इस तरह की होगी जांच
एम्स में बनने वाला बायोसेफ्टी लेवल-3 पूरी तरह से एडवांस रहेगा। इस लैब में यलो फीवर, स्वाइन फ्लू समेत हवा के जरिए फैलने वाले वायरस, बैक्टीरिया के साथ एचआईवी, जीका और इंफ्लूएंजा की जांच हो सकेगी। यहां जांच के नमूने लेने के लिए भी ऑटोमेटिक व्यवस्था होगी। लैब में संक्रमण का खतरा नहीं होगा, क्योंकि इसमें हवा फिल्टर होकर अंदर जाएगी और बाहर निकलेगी। इससे इन्फेक्शन का खतरा नहीं रहता। यही नहीं इसमें हर जांच के लिए पूरी तरह से एयर प्रूफ अलग-अलग क्यूब बने होंगे। बीएसएल -3 लैब को आसानी से कीटाणुरहित करने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।
एम्स रायपुर डॉ. नितिन एम. नागरकर ने बताया की एम्स में जीनोम सिक्वेंसिंग टेस्ट के लिए एडवांस्ट लैब तैयार किया गया है। इसे और अपग्रेड कर बीएसएल-3 लैब बनाया जाएगा। इसके लिए बीते दिनों आईसीएमआर ने निरीक्षण किया है। उम्मीद करते हैं कि जल्द से जल्द यह शुरू हो जाए।
Published on:
15 Jul 2022 04:01 pm
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