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Water Scarcity: गर्मी का असर शुरू… जल को तरसते जलाशय, अप्रैल के मध्य में ये हाल, तो अभी बचा है पूरा मई-जून

Water Scarcity: अप्रैल के मध्य में ये हाल है तो अभी पूरा मई और जून बचा है। बेतहाशा जंगलों की कटाई और वर्षा के जल का समुचित संचय नहीं करना जलाशयों की सूखने के पीछे सबसे बड़े कारक हैं।

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Water Scarcity: गर्मी का असर शुरू... जल को तरसते जलाशय, अप्रैल के मध्य में ये हाल, तो अभी बचा है पूरा मई-जून

Water Scarcity: गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के ज्यादातर बड़े बांधों और जलाशयों का जलस्तर गिर गया है। अप्रैल के मध्य में ये हाल है तो अभी पूरा मई और जून बचा है। जानकार बताते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग, अल्प वर्षा और जलसंसाधनों का गलत उपयोग, बेतहाशा जंगलों की कटाई और वर्षा के जल का समुचित संचय नहीं करना जलाशयों की सूखने के पीछे सबसे बड़े कारक हैं। हर साल इस प्रकार की समस्या पेश आती है लेकिन कभी इसके लिए ठोस उपायों पर चर्चा नहीं होती।

Water Scarcity: गंगरेल बांध: 44 फीसदी ही जलभराव

प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े बांध गंगरेल में तेजी से पानी कम हो रहा है। बांध में अभी कुल 17.033 टीएमसी पानी है। इसमें से 11.962 टीएमसी को ही उपयोगी जल माना जाता है। अभी गंगरेल से धमतरी जिले के 390 और रायपुर और बालौदाबाजार जिले के निस्तारी तालाबों को भरने के लिए 15 मार्च से पानी दिया जा रहा है।

सिंचाई के लिए इस साल भी पानी नहीं देने के कारण ही गंगरेल का भराव 44.17 फीसदी है। इसके अलावा मुरूमसिल्ली में 1.425, दुधावा में 4.245 और सोंढूर में 2.733 टीएमसी पानी है। जिले के चारों बांधों की कुल जलभराव क्षमता 55.176 टीएमसी है। वर्तमान में यहां 25.436 टीएमसी पानी उपलब्ध है।

तांदुला जलाशय: 29 प्रतिशत पानी

दुर्ग संभाग के सबसे बड़े जलाशय तांदुला में सिर्फ 29.54 प्रतिशत पानी है। जबकि पिछले साल 11 अप्रैल को 35.69 प्रतिशत पानी था। तांदुला से भिलाई-दुर्ग, बालोद की प्यास बुझती है। बालोद स्थित खरखरा जलाशय में 28.31 प्रतिशत पानी बचा है। राजनांदगांव स्थित पिपरिया नाले में 59.79 फीसदी, कवर्धा स्थित सरोदा डैम में 53 फीसदी, भिलाई स्थित मरोदा डैम में 33 फीसदी पानी बचा है। जलाशयों में करीब 10 प्रतिशत पानी रिजर्व रहता है, जो निकल नहीं पाता है।

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घुनघुट्टा बांध: 46 फीसदी बचा पानी

घुनघुट्टा डेम को अंबिकापुर का जीवनदाता कहा जाता है। इसी डेम से शहर में पानी की सप्लाई की जाती है। इस डेम में पानी की क्षमता 62.05 एमसीएम है। अभी की स्थिति में घुनघुट्टा डेम में 46 प्रतिशत पानी बचा हुआ है। जो कि 28.5 एमसीएम है। पिछले वर्ष भी लगभग यही स्थिति थी।

बस्तर में हालात पिछले पांच सालों में सबसे खराब

बस्तर के कोसारटेडा जलाशय में पिछले पांच साल में सबसे कम पानी है। इसी वजह से अब कोसारटेड़ा जलाशय से पानी छोड़ना बंद कर दिया गया है।

पानी की क्षमता - 63 क्यूबिक घन मीटर
पानी वर्तमान में - 15.07 क्यूबिक घन मीटर
विगत वर्ष 2024 में - 29.21 क्यूबिक घन मीटर
बिलासपुर संभाग: खूंटाघाट में 37.78 जलभराव

  • बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े जलाशय अरपा भैंसाझार में 39 प्रतिशत पानी बचा है। जलाशय की क्षमता 12.10 मिलियन टन घनमीटर है।
  • कोटा स्थित घोंघा जलाश में 38 फीसदी पानी बचा है। इसकी क्षमता 11.40 मिलियन घन मीटर है।
  • रतनपुर स्थित खारंग (खूंटाघाट) जलाशय में भी 37.78 फीसदी पानी बचा है। पिछले साल 14 अप्रैल की स्थिति में इस जलाशय में 62 फीसदी जलभराव था।

Water Scarcity: ये भी जानें…

  • भारत में कुछ ग्रामीण इलाकों में महिलाएं अपने सिर पर इतना पानी ढो लेती हैं जितना फ्लाइट्स में लगेज ले जाने की इजाजत नहीं होती।
  • इस साल मार्च के अंतिम सप्ताह में ही भारत की प्रसिद्ध मीठे पानी की झील नैनी सूखने लगी। इसे ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम बताया जा रहा।