
यहां संगीत को लेकर किए जा रहे एक्सपेरिमेंट को जानकर हो जाएंगे दंग
ताबीर हुसैन @रायपुर. म्यूजिक का आस्तित्व अनादि काल से है और संगीत का दुनिया से एक अलग ही ताल्लुक है। पेड़ों की झुरमुट से लेकर नदियों की कलकल में म्यूजिक समाया हुआ है। म्यूजिक का नाता सीधे दिल से होता है। संगीत की धुनों की फैंटेसी इस कदर है कि इलाज के रूप में म्यूजिक थैरेपी को शामिल किया गया है। इसका जुनून भी आपको एक अलग ही वल्र्ड की सैर कराता है।
संगीत से हेल्दी बना रहे
नवंबर 2015 में आइपीएस राजीव श्रीवास्तव ने हार्मोनिका क्लब का गठन किया। इसका मकसद था कि संगीत के माध्यम से लोगों को हेल्दी बनाना। क्लब के अध्यक्ष डॉ मनीष जैन कहते हैं कि छाती की कसरत फूंकने वाले वाद्ययंत्रों जैसे बांसुरी, शंख और माउथ आर्गन से होती है। तन-मन-रंजन के तहत हर रविवार को शहर के विभिन्न स्थानों में सुबह 7 बजे अभ्यास कराया जाता है। अभी तक 29 कार्यक्रम हो चुके हैं। रात्रिकालीन दो घंटे का प्रोग्राम छग क्लब, संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम और जेएन पांडे स्कूल में किया जा चुका है। बिलासपुर के कंपनी गार्डन में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है।
कोरस-ताल में एक्सपेरिमेंट
पांच साल से आरुग बैंड के जरिए देश-विदेश में छग को रिप्रजेंट करने वाले पद्मश्री अनुज शर्मा कहते हैं कि म्यूजिक की मूल भावना को छेड़े बिना यदि आप को एक्सपेरिमेंट करते हैं तो यह पॉजिटिव पहल मानी जानी चाहिए। हम अपने बैंड में कोरस व ताल में फ्यूजन की कोशिश करते हैं। दफड़ा, गुदुम, मोहरी, टिमकी, खंजरी, मांदर जैसे पुराने वाद्ययंत्रों से निकला संगीत लोंगों के दिल तक पहुंचता है।
सकारात्मक बदलाव आ रहा है
लैला टिपटॉप छैला अंगूठा छाप, मया, टूरा रिक्शा वाला, मया पार्ट टू, राजू दिलवाला जैसी फिल्मों में हिट म्यूजिक दे चुके सुनील सोनी कहते हैं समय के साथ हर क्षेत्र में बदलाव होना चाहिए। एक समय था जब तबला, हार्मोनियम और बेंजो का यूज ज्यादा से ज्यादा होता था, अब बालीवुड की तर्ज पर ड्रम्स, व प्रोग्रामिंग म्यूजिक का इस्तेमाल होने लगा है। पारंपरिक म्यूजिक को एकदम से हटा देना ठीक नहीं, क्योंकि संगीत में मिट्टी की खुशबू होनी चाहिए।
ट्रेंड में ट्रेडिशनल वायलन
राष्ट्रपति भवन, सप्त्क संगीत समारोह अहमदाबाद, एनसीपीए मुंबई, कलकता में प्रस्तुति दे चुके वायलन वादक रोहन नायडु कहते हैं कि अभी भी ट्रेडिशनल वायलन यानी 4 तार वाला ही ट्रेंड पर है। कुछ लोग पांच, छह और सात तार वाला वायलन बतौर एक्सपेरिमेंट बजा रहे हैं। मैं भी पांच तार वाला ही बजा रहा हूं। मार्केट में इलेक्ट्रानिक वायलन भी आ चुके हैं।
मिलती है मन की शांति
लक्ष्मी स्वर्णकार कहती हैं संगीत एक साधना है। जितना सीखें उतना अच्छा। संगीत मेडिकल ट्रीटमेंट का काम करता है। मन की शांति मिलती है। वे चंडीगढ़ प्राचीन कला केंद्र से शिक्षा हासिल की है। वे बताती हैं कि घर में संगीत का माहौल था। राजधानी में उनकी म्यूजिक एकेडमी है।
गुनरस पिया फाउंडेशन
शास्त्रीय संगीत को समर्पित गुनरस पिया फाउंडेशन के निदेशक दीपक व्यास ने बताया कि संगीत एक ऐसी विधा है जिसके अरबों कद्रदान इस दुनिया में हैं। संगीत में वो जादू है जो किसी औषधि में नहीं। 6 वर्षों से शास्त्रीय संगीत की जड़ों को सींचने बीड़ा उठाया है। महीने में एक बार मासिक बैठक व वर्ष में दो तीन राष्ट्रीय स्तर के आयोजन किया करता आ रहा है। वर्ष में एक बार गुनरस पिया की उपाधि भी किसी योग्य संगीत सेवक को दी जाती है। क्लासिकल वॉइस ऑफ इंडिया का छतीसगढ़ ऑडिशन, क्लासिकल वॉइस ऑफ छत्तीसगढ़ के चुनाव द्वारा छतीसगढ़ प्रदेश से योग्य युवा शास्त्रीय गायकों की पहचान कर उन्हें देश-विदेश के पटल पर नामांकित करने का उपक्रम भी विगत वर्षों से किया जा रहा है।
Published on:
21 Jun 2018 02:27 pm
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