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CG News: नौकरी छोड़ युवाओं के सपने को कर रहे साकार, कोई बना डिप्टी कलेक्टर तो कोई डीएसपी, ऐसे होता है कोचिंग में चयन

CG News: नौकरी छोड़ युवाओं के सपने को कर रहे साकार, कोई बना डिप्टी कलेक्टर तो कोई डीएसपी, ऐसे होता है कोचिंग में चयन

CG News: @ अनुराग सिंह। आमतौर पर हर युवा का सपना होता है कि वह किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करे और लाखों रुपए कमाए, लेकिन रायपुर के चंद्रेश कुमार ने अपनी दिशा और अपनी परिभाषा खुद तय की। उन्होंने टाटा जैसी मल्टीनेशनल कंपनी में सॉटवेयर इंजीनियर की नौकरी और चमकदार भविष्य को छोड़कर आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी युवाओं के सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया। चंद्रेश ने अपने प्रणीत सिहा के साथ मिलकर 2019 में ‘‘नेतृत्व साधना केंद्र’’ की शुरुआत की। इस निशुल्क कोचिंग सेंटर में अब 110 युवा सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं। पिछले दो सालों में यहां से 6 युवाओं का चयन छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा में हुआ है।

रायपुर के फुंडहर में संचालित यह केंद्र पूरी तरह निशुल्क है। वर्तमान में यहां 110 युवा रहकर सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा 2024 के नतीजों में चार और युवा सफल हुए। इनमें एक डिप्टी कलेक्टर बना। अब तक इस केंद्र से निकले युवा डीएसपी, चाइल्ड एवं वुमन डेवलपमेंट ऑफिसर, कॉपरेटिव ऑफिसर और रेवेन्यू इंस्पेक्टर जैसे पदों पर चयनित हो चुके हैं।

ऐसे होता है कोचिंग में चयन

इस केंद्र पर प्रवेश किसी फीस नहीं, बल्कि टेस्ट और इंटरव्यू के जरिए होता है। इसके लिए प्रवेश परीक्षा हर वर्ष मार्च में सभी जिलों में आयोजित की जाती है। चंद्रेश बताते हैं कि चयन में विद्यार्थियों की जानकारी से ज्यादा लगन, सोच व सिविल सेवा की तैयारी को लेकर संकल्प देखा जाता है। यदि किसी छात्र में क्षमता हो, तो कोचिंग दो साल से आगे भी जारी रहती है।

ऐसे हुआ चंद्रेश का हृदय परिवर्तन

चंद्रेश कुमार मल्टीनेशनल कंपनी टाटा में लगभग साढ़े तीन साल काम कर चुके थे। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी शुरू की। उन्होंने दो बार यूपीएससी मेन्स दी। एक बार उनका आना दंतेवाड़ा हुआ। यहां ‘‘बचपन बनाओ’’ संस्था के साथ काम करने का मौका मिला और वहीं से उनकी सोच बदल गई। पहले वह दंतेवाड़ा, दुर्ग और अंतत: रायपुर पहुंचे। यहां हॉस्टल उपलब्ध कराने के लिए रायपुर कलेक्टर की मदद भी मिली और नेतृत्व साधना केंद्र धीरे-धीरे आकार लेता चला गया। चंद्रेश कुमार ने बताया अब उनके साथ 10 शिक्षक जुड़े हुए हैं, जिनकी सैलरी स्पॉंसर के जरिए दी जाती है। साथ ही व्यक्तिगत डोनेशन भी मिलते हैं।