
21 दिनों बाद शुरू हुई डायलिसिस सुविधा
रायसेन. जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट करीब इक्कीस दिनों के बाद शुरू हो सकी है। आरओ सिस्टम न होनेकी वजह से किडनी पीडि़त मरीजों की फ्री डायलिसिस की सुविधा नहीं मिल पा रही थी। आरओ सिस्टम का ठेका प्रदेश के एक ठेकेदार कंपनी के पास है। इस कंपनी के इंजीनियर भ ीकम हैं।
अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों द्वारा लगभग २१ दिन पूर्व इस समस्या से अवगत करवा दिया था। लगभग २१ दिन बीत जाने के बाद यह काम पूर्ण हो सका । अब मरीजों के लिए नि:शुल्क डायलिसिस सुविधा मिलना सोमवार से शुरू हो गया है।
रोजाना यहां दो से तीन किडनी पीडि़त मरीजों की डायलिसिस होना शुरू हो गया है। मालूम हो कि पत्रिका ने जनहित से जुड़ी खबर मरीजों की नहीं मिल रही डायलिसिस सुविधा,एक्सरे मशीन भी खराब शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी ।इसी खबर का असर यह हुआ कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस सुविधा को आरओ वाटर सिस्टम में सुधार करवाकर इस इमरजेंसी यूनट को शुरू करवा दिया गया है।
मेडिकल अधिकारी एवं डायलिसिस यूनिट प्रभारी डॉ.एमएल अहिरवार के अनुसार प्र्रतिदिन दो से तीन मरीजों की डायलिसिस होने लगी है। सोमवार को तीन व मंगलवार को चार किडनी मरीजों की डायलिसिस की गई। डायलिसिस सेंटर की टैक्नीशियन शिवानी श्रीवास्तव,स्टाफ नर्स ज्योति अतुलकर नेबताया कि प्रतिदिन सुबह १० से शाम ५ बजे तक २ से ४ मरीजों की डायलिसिस की जाने लगी है।
सिर्फ प्रसूताओं की हो रही सोनोग्राफी
जिला अस्पताल में की सोनाग्राफी यूनिट के भी बुरेहाल हैं। तत्कालीन रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एसएस कुशवाह हर दिन ८० से ९० प्रसूताओं, मरीजों की सोनोग्राफी करते थे। जब से उन्होंने वीआरएस लेकर नौकरी छोड़ी है।तब से जिला अस्पताल की सोनोग्राफी यूनिट पर संकट खड़ा हो गया है।
मौजूदा समय में जिला अस्पताल प्रबंधन ने सोनोग्राफी कराने की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफीसर डॉ.दीपक गुप्ता, स्त्री रोग चिकित्सक जिंसंी ठाकुर को सौंपी है। तभी से सोनाग्राफी सिस्टम और भी ज्यादा गड़बड़ा गई है। वर्तमान समय में बमुयिश्कल प्रतिदिन अब १५ से २० सिर्फ प्रसूताओं की ही सोनोग्राफी हो पाती है। ऐसी स्थिति में अन्य प्रसूताओं को दो से तीन व पांच दिनों तक का नंबर दिया जा रहा है।
जिससे प्रसूताएं बेहद परेशान हैं। जिले से रैफर होकर अस्पताल आने वाले पेट संबंधी व अन्य बीमारी ेस परेशान मरीजों की सोनोग्राफी के लिए तो चिकित्सक साफ इंकार कर देते हैं। मजबूरी में उन मरीजों को बाजार से ९०० रूपए जेब से खर्च कर सोनोग्राफी कराना पड़ रही है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में जिन दो चिकित्सकों को अस्पताल प्रबंधन ने केवल प्रसूताओं की सोनोग्राफी का जिम्मा सौंपाहै वह अपने आधे प्रायवेट मरीजों की सोनोग्राफी करके चले जाते हैं। जिससे परेशानी बढ़ी हुई है।
हमने कंपनी के इंजीनियरों को बुलवाकर आरओ वाटर सिस्टम में सुधार करवा लिया है। यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है। इसे एक दो महीने में कराना जरूरी होता है।सोनोग्राफी के लिए एक्सपर्ट रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत होती है। जल्द ही इसकी कमी भी दूर कर ली जाएगी।डॉ.बीबी गुप्ता सिविल सर्जन अस्पताल
Published on:
13 Jun 2018 03:03 pm

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