
जिला जेल पठारी में दो कैदी आपस में भिड़े
रायसेन. जिला जेल पठारी के अंदर इन दिनों कैदियों की सल्तनत चल रही है। जेल के कारागार में बंदियों की जब चाहे आपस में विवाद,मारपीट और जानलेवा हमले होना आम बात हो चुकी है। इससे साफ जाहिर होता है कि जेल अधिकारियों का कैदियों पर मानो कोई खौफ और नियंत्रण नहीं है। यही वह खास वजह है कि सोमवार की रात दो कैदियों की थोड़ी से धक्का-मुक्की के बाद जमकर मारपीट हो गई।
घायल हालत में एक कैदी को जेल प्रबंधन के पुलिस अधिकारी मंगलवार को सुबह इलाज कराने लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। आरएमओ डॉ.यशपाल सिंह बाल्यान,सर्जरी सर्जन डॉ.दिनेश खत्री से घायल कैदी का उपचार कराने के बाद वापस जिला जेल पठारी लेकर आ गए। इधर, कैदी की मां सहित परिजनों ने जेल प्रबंधन पर मनमानी व रूपये बुलवाने के आरोप लगाए हैं। जेल में कैदियों के बीच मारपीट होना कोई नई बात नहीं है। इससे महीने भर पहले भी दो कैदियों के बीच जानलेवा हमला हो गया था।बाद में आनन-फानन में जेल प्रबंधन ने कोतवाली थाना रायसेन में घायल कैदी को भिजवाकर आरोपी कैदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी । कैदियों की आपसी भिडंत होने की वजह क्षमता से ज्यादा कैदियों का भी बैरिक में होना बताया जा रहा है।
ये है विवाद का मुख्य कारण ....
पठारी जिला जेल प्रबंधन के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की रात करीब साढ़े ६ बजे कैदियों की बैरिक क्रमांक -१ में गणना के बाद उन्हें कारागार में बंद कराने के दौरान कैदी अर्जुन रैकवार और राजेश मीणा के बीच थोड़ी सी धक्का-मुक्की हो गई। इस विवाद को लेकर बंदी राजेश मीणा ने अर्जुन रैकवार से लातघूसों से मारपीट करते हुए उसे एक चबूतरे पर पटक दिया ।
जिससे अर्जुन रैकवार की कमर ,छाती व घुटनों हाथ में चोटें लगी हैं। घायल कैदी अर्जुन रैकवार की मां व परिजनों के आरोप हैं कि रात में ही घायल का इलाज जिला अस्पताल में क्यों नहीं कराया गया ?इसकी सूचना भी हमें नहीं दी गई। मंगलवार को सुबह जेल प्रबंधन द्वारा चोरी चुपके तरीके से घायल अर्जुन रैकवार को जेल प्रहरियों के माध्यम से जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ.यशपाल सिंह बाल्यान और शल्य सर्जरी सर्जन डॉ.दिनेश खत्री ने चेकअप किया । एक्सरा-कराने के बाद उसकी ेसहत की जांच की।अर्जुन रैकवार महाराणा प्रताप नगर कॉलोनी वार्ड १३ रायसेन निवासी है। उसका सागर में एक व्यक्ति से मारपीट के बाद छुरी से हमलेकरने पर भादंवि की धारा ३२६ में कोर्ट ने चार-चार साल की सजा सुना दी थी।वह सागर सेंट्रल जेल में बंदी थी । उसका ट्रांसफर जिला जेल पठारी में करवा लिया है।
उसके परिजनोंने हाईकोर्ट जबलपुर में अपील की है। राजेश मीणा भी मारपीट, हत्या के प्रयास के मामले में कैदी है। घायल बंदी अर्जुन रैकवार की मां और भाई संतोष रैकवार समेत परिजनोंने जेल प्रबंधन पर मनमानी और १० हजार रूपए नकद बुलवाने के आरोप लगाए हैं। इनका कहना है कि जेल अधिकारी कैदियों पर दबाव बनाते हैं। कैदियों से बोलते हैं घर से रूपयों बुलवाओ वरना कैदियों की मार खाना पड़ेगी । यहां कई खूंखार कैदी भी बैरिकों में कैद हैं। जिस कैदी के परिजन जेलप्रबंधन की डिमांड कर देते हैं उन्हें बाहर का भोजन का टिफिन अंदर लाने की आसानी से छूट मिल जाती है।
एक महीने पूर्व भी जेल में हुई थी कैदियों में मारपीट
जिला जेल पठारी में जेल प्रबंधन के अधिकारियों का मानो कोई नियंत्रण नहीं है। यही वह खास कारण है कि कैदियों के हौंसले काफी बुलंद हो रहे हैं। २१ सितंबर २०१८ को भी जिला जेल पठारी में दो खूंखार कैदियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया था। बाद में जेल प्रबंधन के अधिकारी इस विवाद को लेकर कोतवाली थाने पहुंचे थे। हुआ यूं कि प्रदीप,गोली बैरागी का जेल के अंद रबैरिक में बंदी इमरान मोहम्मद से विवाद हो गया ।
गुस्सा बंदी प्रदीप गोलू बैरागी ने स्टील गिलास को मोड़कर उसके कैदी इमरान मोहम्मद के माथे व खेपड़ी पर हमला कर लहूलुहान कर दिया था। जब घायल कैदी के परिजनों ने जेल प्रबंधन के अधिकारियों पर दबाव बनाया शिकायत करने की धमकी दी। तब जेलर केके तिवारी के निर्देश पर जेल प्रहरी घायल इमरान को लेकर कोतवाली थाने पहुंचे आरोपी कैदियों के खिलाफ जानलेवा हमले व मारपीट का केस दर्ज कराया ।
क्षमता १०० कैदियों की बंदी हैं २५६
जिला जेल पठारी के पांच बैरिकों के हिसाब से क्षमता २० स े२३ कैदियों की होना चाहिए ।लेकिन इन दिनों हरेक बैरिक में ५३ -५४ कैदी बंदी हैं। जिला जेल पठारी में २५६ कैदी पुरूष,एक महिला बैरिक में ७ महिला कैदी ४ उनके छोटे बच्चे कैद हैं। इस तरह जेल में क्षमता से अधिक कैदी कारागार में बंदी हैं।जिला जेल पठारी में क्षमता से अधिक कैदियों के बढऩे से भी उनमें जरा-जरा सी बातों को लेकर मारपीट व विवाद होने लगा है। वहीं जेल प्रबंधन के अधिकारियों का कैदियों पर ना तो किसी तरह का खौफ है और न दबाव। इस कारण कैदियों के हौसले काफी बुलंद होने लगे हैं। दबंग व रसूखदार कैदियों को जेल में एक छत्र राज चल रहा है। इन पेशेवर व खूंखार कैदियों सेअधिकारी व जेल प्रहरी भी डरते हैं।
जिला जेल पठारी में स्टाफ की कमी से परेशानी
जिला जेल पठारी में बरसों से स्टाफ की कमी बरकरार है। इस कारण कैदियों पर नियंत्रण करना बड़ा मुश्किल हो रहा है। जिला जेल में ३ पद जेल प्रहरियों ,१ पद मुख्य जेल प्रहरी,१ पद स्वीपर और १ पद वाहन चालक का रिक्त है। यहां एक जेल अधीक्षक व उप अधीक्षक का पद तो भर चुका है। फिलहाल वह प्रशिक्षण पर गए हुए हैं। इसके अलावा एक कंपाउंडर व पैरामेडिकल एक फीमेल नर्स का पद भी रिक्त है। वहीं दो वाहनों की कमी व एक एबुंलेंस की कमी बनींहुई है।
वाहनों के अभाव में कैदियों में महीनेमें कम से कम १० पेशियां कोर्ट में नहीं हो रही हैं। जिला जेल पठारी को हाईटैक तो बना दिया । लेकिन वीडियो कांफ्रेंङ्क्षसग और मोबाइल से कैदियों की सीधी बातचीत परिजनों से नहीं हो पा रही है। क्योंकि यहां तकनीकि कर्मचारियों का टोटा बना हुआ है।
Published on:
24 Oct 2018 03:11 pm
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