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मढ़ई मेला देखने गए बच्चे जंगल में भटके

दूसरे दिन दोपहर सांईखेड़ा पहुंचे, बरेली पुलिस ने किए बरामद ,पुलिस ने गढ़ी कहानी

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आदिवासियों को जंगल से बाहर करने के विरोध में आत्महत्या का प्रयास

रायसेन. जिले के थाना बरेली के पुलिस चौकी खरगौन के तहत आने वाले जामगढ़ निवासी तीन किशोर शनिवार को सुबह मढ़ई मेला घूमने गए । जंगल में रास्ते भटकने से वह घर नहीं पहुंच सके। जब तीनों बच्चे रात में घर नहीं पहुंचे तो परिजन चिंता में पड़ गए। बच्चों की तलाश करने उनके परिजन ग्रामीण हाथों में सर्च लाइट लेकर जंगल के रास्ते में रातभर परेशान होते रहे ।

खरगौन,बरेली थाने के पुलिस कर्मियों ने भी मदद करते हुए इन तीनों लापता किशोरों को ढूंढने में सहयेाग दिया । शनिवार को सुबह ११ बजे से लापता यह किशोर सांईखेड़ा सिलवानी जा पहुंचे। सूचना मिलने पर बरेली पुलिस परिजनों की मदद से उन बच्चों को पकड़कर बरेली खरगौन पुलिस के पास लाया गया । यहां पुलिस अधिकारियों ने उनके बयान दर्ज करने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया ।

लेकिन बरेली पुलिस ने जो मनगढंत कहानी बताई वह इस तरह है कि शनिवार को सुबह ११ बजे यह तीनों बच्चे जामगढ़ से अपने घर से जंगल में जलाऊ लकडिय़ां काटने गए थे। जंगल में रास्ता भटक जाने से वह रात भर जंगल में ही भटकते रहे वह घर नहीं पहुंच पाए ।
बरेली थाने के एएसआई केके ठाकुर ने बताया कि यह तीनों बच्चे जामगढ़ निवासी तुलसीराम शाक्या पुत्र खेमचंद उम्र १७ ,कक्षा ९वीं के छात्र प्रकाश कुशवाह पुत्र हल्के वीर उम्र १४ वर्ष और धीरज सिंह पुत्र कोमल सिंह उम्र १३ वर्ष निवासी जामगढ़ शनिवार को सुबह ११ बजे नजदीक के जंगल में जलाऊ लकडिय़ां चुनने गए थे। लेकिन वह रास्ता भटक जाने से घर नहींपहुंच पाए और जंगल में रात भर भटकते रहे और जंगल के रासते से उतरकर सांईखेड़ा सिलवानी चले गए ।

लेकिन हकीकत तो यह है कि यह तीनों जामगढ़ निवासी किशोर पास में लगने वाले मढ़ई मेला घूमने गए थे। लौटते समय वह जंगल से रास्ता भटक गए । जो घूमते हुए रविवार को दोपहर लगभग सवा एक बजे सीधे सांईखेड़ा जा पहुंचे थे। पुलिस ने इन तीनों किशोरों के बयान दर्जकर परिजनों के हवाले कर दिए हैं। बच्चों को सकुशल देखकर परिजन रो पड़े ।