नई सीट बनते ही पहला चुनाव हुआ। इसमें एक नई पार्टी के उम्मीदवार ने चार चुनाव जीतने वाले भाजपा के दिग्गज को हरा दिया। यह कहानी है रायसेन जिले की सिलवानी सीट की जहां तीसरी शक्ति जनशक्ति पार्टी ने अपना झंडा लहराया था।
नई सीट बनते ही पहला चुनाव हुआ। इसमें एक नई पार्टी के उम्मीदवार ने चार चुनाव जीतने वाले भाजपा के दिग्गज को हरा दिया। यह कहानी है रायसेन जिले की सिलवानी सीट की जहां तीसरी शक्ति जनशक्ति पार्टी ने अपना झंडा लहराया था।
अपने गठन के 15 सालों में ही प्रमुख मुकाबले की जमीन बनी सिलवानी विधानसभा एक बार फिर आगामी चुनाव में कड़े मुकाबले की साक्षी बनेगी। खास बात यह कि जिले में तीसरी ताकत यानि भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरी पार्टी ने इसी सीट से जीत हासिल की थी। गठन के बाद 2008 में हुए पहले चुनाव में यहां से उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी ने जीत का परचम फहराया था।
उस चुनाव में भाजश से देवेंद्र पटेल ने जीत हासिल की थी। उन्होंने उदयपुरा विधानसभा से लगातार चार चुनाव जीतने वाले भाजपा के रामपाल सिंह को बेहद नजदीकी मुकाबले में मात्र 247 वोटों से हराया था। हालांकि इसके बाद के दो मुकाबलों 2013 और 2018 में रामपाल सिंह ने देवेंद्र पटेल को हराकर बदला ले लिया। इन दो चुनावों में देवेंद्र पटेल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे।
जनशक्ति पार्टी के भाजपा में विलय के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। सिलवानी विधानसभा का चौथा चुनाव होने वाला है। भाजपा ने यहां से एक बार फिर रामपाल सिंह प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी की घोषणा होना बाकी है।
आदिवासी वोट करते हैं फैसला
सिलवानी विधानसभा आदिवासी और पिछड़ा वर्ग बहुल है। यहां जीत और हार का फैसला आदिवासी मतदाता करते रहे हैं। जो सबसे ज्यादा लगभग 27 हजार हैं। जीत के लिए दोनो की पार्टियां आदिवासी वोटों पर ही अपनी ताकत झोंकती हैं। इसके लिए कई तरह के पैंतरे भी लगाए जाते हैं। ऐसा इस बार भी देखने को मिलेगा। डमी प्रत्याशी को उतारना, जातिगत पैंतरेबाजी इस चुनाव में भी जमकर नजर आने वाली है।
पिछले चुनाव पर नजर डालें तो भाजपा के रामपाल सिंह ने कांग्रेस के देवेंद्र पटेल को 7072 वोटों से हराया था। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आदिवासी नेता नीलमणि शाह ने 16892 वोट प्राप्त किए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आदिवासी वोट इस विधानसभा में कितने प्रभावी हो सकते हैं।
ऐसा है वोटों का बंटवारा
सिलवानी विधानसभा में सबसे अधिक लगभग 27 हजार वोट आदिवासी समाज के हैं। जबकि राजपूत, ठाकुर तथा दांगी समाज के 23 हजार वोट हैं। ब्राह्मण समाज भी यहां लगभग 24 हजार वोटों के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता है।
एससी वर्ग 20 हजार और मुस्लिम वर्ग के 16 हजार वोटों के अलावा साहू, कुशवाहा, जैन, रघुवंशी, यादव, कुर्मी, किरार समाज के मतदाता भी अपनी उपस्थिति से चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं। जो सभी आठ से दस हजार के आस-पास हैं। इनके अलावा किरार, गुर्जर, घोषी, विश्वकर्मा, सेन, कायस्थ, मीणा, सोनी, केवट, गोस्वामी, नेमा, पटवा जैसे समाजों के वोट भी इस विधानसभा में हैं।