पहले फेस में 48 करोड़ से युनिवर्सिटी के निर्माण की हो रही शुरुआत।
प्रवीण श्रीवास्तव, रायसेन. 21 सितंबर 2012 को भूमिपूजन तथा 2013 में बारला में किराए के भवन में शुरुआत के बाद अब युनिवर्सिटी के अपने परिसर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है। पहले फेस में 48 करोड़ से निर्माण का कार्य पर्यटन विकास निगम द्वारा शुरू किया गया है। इससे पहले भवन और परिसर में विभिन्न तरह के निर्माण कार्यों की डिजाइन तैयार करने में लंबा समय लगा। गोल पहाड़ी पर मुख्य परिसर का निर्माण भी गोलाकार ही किया जा रहा है। जिसके केंद्र में भूमिपूजन के दौरान श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे द्वारा रोपा गया बोधि वृक्ष रहेगा। निर्माण कब तक पूर्ण होगा यह तो अभी तय नहीं है, लेकिन निर्माण शुरू होने से युनिवर्सिटी को लेकर चलती रही विभिन्न चर्चाओं पर विराम लग गया है। अब यह तय हो गया है कि सांची युनिवर्सिटी रायसेन जिले में और सांची के पास ही रहेगी। फिलहाल यह युनिवर्सिटी सांची में पर्यटन विकास निगम के एक बड़े भवन में संचालित की जा रही है।
24.20 हैक्टेयर में होगा कुल निर्माण
युनिवर्सिटी परिसर का निर्माण 24.20 हैक्टेयर यानि 06 लाख 05 हजार 170.5 वर्ग फीट में किया जाएगा। जिसमें 2956 वर्ग मीटर में एक एकेडमिक भवन का निर्माण होगा। इसके अलावा 1886 वर्ग मीटर में एक बड़ी लाइब्रेरी, 2020 वर्ग मीटर में एडमिन भवन, 930 वर्ग मीटर में सेमिनार कक्ष, 2696 वर्ग मीटर में दो ब्आयज छात्रावास तथा 1353 वर्ग मीटर में एक गल्र्स छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। एक गेस्ट हाउस का निर्माण भी परिसर में ही किया जाएगा। यूनिवर्सिटी के वीसी और रजिस्ट्रार के अलावा प्रोफेसरों सहित अन्य कर्मचारियों के लिए आवासों का निर्माण भी किया जाएगा। एक छोटा तालाब, एक फुटबॉल कोर्ट का निर्माण भी परिसर में ही किया जाएगा। विशाल प्रवेश द्वार हाइवे की तरफ रहेगा।
युनिवर्सिटी एक नजर में
सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की शुरुआत वर्ष 2013 सत्र से ग्राम बारला में एक किराए के भवन में की गई थी। बीते सत्र में युनिवर्सिटी सांची स्थित पर्यटन विकास निगम के भवन में स्थानांतरण किया गया। वर्तमान में युनिवर्सिटी में 101 तरह के कोर्स संचालित हैं जिनमें लगभग 400 देश, विदेश के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। युनिवर्सिटी की कुलपति डा. नीरजा गुप्ता तथा कुल सचिव अलकेश चतुर्वेदी हैं।
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