रायसेन. अब अप्रैल माह आधा बीत चुका है और गर्मी ने भी अपना तीखा रुख दिखाना शुरू कर दिया है। दिनों दिन बढ़ रहे तापमान के साथ ही भू-जल स्तर में भी गिरावट होने लगी है। जिले भर में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। गिरते जल स्तर के कारण शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप और ट्यूबवेल सहित कुए भी साथ छोडऩे लगे हैं। इससे लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है और पानी भरने के लिए सुबह से लेकर शाम तक लोग इधर-उधर भटकते नजर आते हैं।
पीएचएई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 34 मीटर यानि सौ फीट से अधिक भू-जल स्तर खिसका चुका है। जबकि दो माह पहले जहां 21 मीटर के लगभग जल स्तर बताया जा रहा था। लेकिन मार्च माह के अंत में तेज गर्मी की शुरुआत होने के कारण अब हालात काफी बदल गए हैं। जिले के बेगमगंज विकासखंड में तेजी से जल स्तर गिरा है। इन दिनों यहां पर लगभग 34.10 मीटर तक भू-जल स्तर में गिरावट आई है। इसके बाद गैरतगंज विकासखंड दूसरे नंबर बताया जा रहा है। यहां 33.6 मीटर तक जल स्तर पहुंच चुका है। इससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में समस्या और अधिक बढ़ सकती है।
रायसेन शहर के अधिकतर वार्डों में लोगों को टैंकरों के भरोसे ही रहना पड़ रहा है। टैंकर सुबह से लेकर शाम तक जब भी आए जाए। लोग पानी भरने के इंतजार में ही बैठै रहते हैं। बताया जा रहा है कि शहर में लगभग नौ वार्डों में दो दर्जन टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है। नपा से मिली जानकारी के अनुसार शहर में 110 हैंडपंप है और इनमें से करीब 65 बंद हो चुके हैं।इसके अलावा 30 नलकूप हैं और आठ बंद हो गए हैं। इस कारण शहरी क्षेत्र में भी पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। वार्ड 13 अशोक नगर, तजपुरा, वार्ड 1,04, 09, 11, 12, 14 के कई हिस्सों में समस्या काफी अधिक है। नपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर में 500 से 550 फीट पर पानी उपलब्ध हो पा रहा है।
पीएचई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में कुल 10 हजार 390 हैंडपंप हैं और इनमें से 800 बंद बताए जा रहे हैं। बाकी नौ हजार 590 में से करीब तीन हजार हैंडपंपों में पानी कम दबाब से आना बताया गया है। आगामी मई माह में गर्मी और अधिक पडऩा है। ऐसे में कम दबाब से पानी देने वाले हैंडपंपों के भी बंद होने की संभावना लग रही है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 328 नल-जल योजनाएं संचालित हैं और इनमें से 107 फिलहाल बंद है। विभागीय जानकारी के मुताबिक लगभग आधी योजनाओं का ग्राम पंचायतों द्वारा सही तरीके से रख-रखाव नहीं किया गया। बिजली बिल, तकनीकी समस्या आदि के चलते बंद हो गई है। कुछ नल-जल योजनाओं के जल स्रोत बंद हो गए हैं कहीं पर पाइप लाइन टूटी-फूटी होने के कारण जल सप्लाई नहीं हो पा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से हैंडपंप ही पानी का स्रोत है। धीरे-धीरे ये हैंडपंप साथ छोड़ते जा रहे हैं। हर सप्ताह दर्जनों गांवों में हैंडपंप सूखने और कम पानी देने की सूचना मिल रही है। लेकिन पीएचई विभाग के आंकड़े अभी एक ही जगह पर अटके हुए हैं। इस कारण ग्रामीणों को पानी के लिए दूर खेतों तक पहुंचना पड़ता है। तब जाकर पीने का पानी उपलब्ध हो रहा है। जबकि पीएचई के अधिकारी स्थिति ठीक होने की बात करते हैं। लेकिन मैदानी स्थिति कुछ और ही है।
भू-जल स्तर में गिरावट तो आई है। लेकिन उपाय भी किए जा रहे हैं। जहां हैंडपंप में पानी नीचे गया है वहां राइजर पाइप बढ़ाने का काम किया है। लगभग 10 हजार मीटर राइजर पाइप बढ़ाए। इसके बाद भी हैंडपंप नहीं चल रहे हैं। वहां पर सिंगल फेस मोटर डाली हैं। लगभग 125 गांवों में मोटर डाली जा चुकी है। - सुबोध जैन, ईई पीएचई विभाग