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हर बजट में मिल रहे 100 से 200 करोड़, लेकिन उपयोग नहीं होने से लेप्स हो रही राशि, नतीजा मप्र सीमा में नींव तक नहीं रखी!

- रामगंजमंडी-भोपाल रेल लाइन- 2022 में नहीं दौड़ पाएगी ट्रेन, मप्र सीमा हर बार मिली राशि लेकिन रेल्वे उपयोग ही नहीं कर पाई

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हर बजट में मिल रहे 100 से 200 करोड़, लेकिन उपयोग नहीं होने से लेप्स हो रही राशि, नतीजा मप्र सीमा में नींव तक नहीं रखी!

हर बजट में मिल रहे 100 से 200 करोड़, लेकिन उपयोग नहीं होने से लेप्स हो रही राशि, नतीजा मप्र सीमा में नींव तक नहीं रखी!

ब्यावरा. 2022 तक राजगढ़ जिले की जनता का ट्रेन में बैठना फिलहाल सपना ही रह सकता है। इस बार की पिंक बुक में भले ही 108 करोड़ रुपए मिल गए हों लेकिन उनका भी उपयोग हो पाना तय नहीं है।

बीते कई सालों से जमीन अधिग्रहण में ही उलझे रेलवे और प्रशासन की अनदेखी के कारण तीन साल से हर बजट में मिल रही राशि लेप्स हो रही है। इसी कारण इस प्रोजेक्ट की मप्र में नींव तक नहीं रखी गई। वहीं, राजस्थान के झालावाड़ तक ट्रेन दौडऩे भी लगी है। बचा हुआ काम भी पूरा होने को है।

दरअसल, 2018 से लेकर आज तक और इससे पहलेभी लगभग हर बजट में रामगंजमंडी-भोपाल रेल लाइन के लिए रह्वाशि मिली। तब जाकर यह 600 करोड़ का प्रोजेक्ट 1300 करोड़ से पार पहुंचा गया लेकिन हकीकत यह है कि इसका उपयोग रेल्वे और जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते हो नहीं पा रहा।

तीन साल से रेल्वे के तमाम अधिकारी और सत्ताधारी पार्टी के सासंद, नेदा दावा कर रहे हैं कि इसे पीएम के फॉस्ट टैग प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है लेकिन अभी तक गति नहीं मिल पाई। ऐसे में माना जा रहा है कि 2022 तक किसी भी हाल में भोपाल से रामगंजमंडी के बीच ट्रेन नहीं दौड़ पाएगी?

मोहनपुरा क्षेत्र की में घुमाव का भी समाधान तय नहीं!
करीब तीन साल पहले ही सामने आएमोहनपुरा परियोजना के आस-पास के बड़े मुद्दे पर भी जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग मौन है। दो साल पहले फाइनल सर्वेके बाद तय हुआ था कि करीब 100 किमी टर्न सीधा किया जाएगा जिससे कुछ गांव प्रभावित होंगे।

पहले किएगएसर्वे में मोहनपुरा डेम के जल भराव वाले हिस्से को भी जोड़ लिया गया था। जिसमें खानापूर्ति के लिएप्लॉनिंग तो कर ली गईलेकिन आगे नहीं बढ़ पाई। ऐसे में अभी भी खिलचीपुर से राजगढ़ और राजगढ़ से ब्यावरा के बीच की जमीन का मुद्दा भी अटका पड़ा है। इसके अलावा ब्यावरा से आगे वाले हिस्से में भी जमीन अधिग्रहित होना है लेकिन न रेल्वे इसे लेकर गंभीर है न ही जिला प्रशासन।

फैक्ट-फाइल
- 1365 करोड़ से बनना है रामगंजमंडी-भोपाल लाइन।
- 700 करोड़ रुपए का प्रपोजल शुरू में बना था, जिसे बाद में बढ़ाया।
- 108करोड़ रुपएइस बार के बजट में मिले।
- 200करोड़ वर्ष-2016 में मिले थे।
- 100करोड़ 2017 में मिले।
- 200करोड़ 2018 में मिले।
-झालावाड़ तक चालू हो चुकी है लाइन।
-मप्र में रेल्वे के नाम पर महज भू-अर्जन।
- 260किमी का है पूरा प्रोजेक्ट।
(नोट : रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार)

काम नहीं हो पाया तो लेप्स हो गई राशि
2003 के आस-पास 100 करोड़ मिले थे जिसमें मप्रकी सीमा से ब्यावरा तक के काम के टेंडर भी लग गए थे लेकिन उसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। तब से जमीन अधिग्रहण से आगे काम ही नहीं हुआ। जो राशिमिली थी वह उपयोग नहीं हुई तो दूसरी जगह ट्रांसफर कर दी गईथी। यहां की राशिलेप्स हो गईथी।
- राशिद जमीन, पूर्वसदस्य, रेलवे सलाहाकार समिति, राजगढ़

जमीन का मसला है
जमीन का कुछ मामला खिलचीपुर-राजगढ़ के बीच का शेष है, बाकी इसमें पूरा काम किया जा रहा है। 108 करोड़ इस बार मिले हैं। साथही पीएम के फॉस्टटैग प्रोजेक्ट में शामिल है। 2022 तक ट्रेन हर हाल में चलने लगेगी।
- रोडमल नागर, सांसद, राजगढ़


राशि तो मिली है
पिछले कुछसालों में भी और इस बार भी कुछराशि मिली है। पिंकबुक की पूरी जानकारी हमारे पास नहीं पहुंच पाई है। हां इतना जरूर है कि रामगंजमंडी लाइन के लिए राशिआईहै, अब लेप्स कहां हुईये इंजीनियरिंग वाले ही बता पाएंगे।
- आईए सिद्धिकी, पीआरओ, रेल मंडल, भोपाल