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डिजीटल पैमेंट के लिए ब्यावरा में खोले थे 90 सीएससी सेंटर, पहले ही महीने आई दिक्कत, भीड़ बढ़ी तो काउंटर खोलना पड़

एमपीईबी में सफल नहीं हुआ डिजिटल भुगतानशहीद कॉलोनी स्थित दफ्तर में शुरू किया गया मैनुअल काउंटर, सेंटर्स पर जनता को रास नहीं आई शासन की नई व्यवस्था

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एमपीईबी में सफल नहीं हुआ डिजिटल भुगतान

एमपीईबी में सफल नहीं हुआ डिजिटल भुगतान

ब्यावरा.पूर्णत: कैशलेस ट्रांजेक्शन और डिजिटल पैमेंट के लिए एक फरवरी से लागू की गई व्यवस्था बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को रास नहीं आई। शुरुआत में एक सप्ताह लागू हुई व्यवस्था में शहर में खोले गए 90 कॉमन सॢवस सेंटर (सीएससी) पर भी उपभोक्ता नहीं पहुंचे। फिर अचानक बिजली कंपनी के दफ्तर में बढ़ी भीड़़ के बाद मैनुअली काउंटर की ही व्यवस्था करना पड़ी।
दरअसल, बिजली कंपनी ने जिलेभर में एक साथ सीएससी सेंटर खोले। इसके तहत ब्यावरा में 90 केंद्र खोले। निजी वेंडर्स के माध्यम से होने वाले काम के तहत पहले माह के बिल पर पांच रुपए अतिरिक्त प्रति बिल पर वेंडर को देना होते हैं। इसके बाद यह राशि अगले माह के बिल में रिफंड होकर आएगी। यह टिपिकल प्रक्रिया लोगों को समझ नहीं आई और लोग सेंटरों तक पहुंच ही नहीं पाए। हालात यह रहे कि इतनी जटिल प्रक्रिया उन्हें समझ नहीं आने में प्रचार-प्रसार का भी अभाव रहा।

इसके अलावा एटीपी मशीन का उपयोग भी बिजली कंपनी के दफ्तर में लोग ज्यादा नहीं कर पाए। नजीता यह रहा कि पहले ही सप्ताह में लोगों की भीड़ दफ्तर में लग गई। कुछ दिन बाद ही बिजली कंपनी के अधिकारियों को मैनुअल काउंटर खोलना पड़ा।
जिलेभर में नहीं मिला ज्यादा रिस्पांस
बिजली कंपनी की उक्त नई व्यवस्था को ज्यादा रिस्पांस नहीं मिल पाया। जिलेभर में किसी भी सेंटर पर बहुत अ'छी प्रतिक्रिया नहीं आ पाई। इसके पीछे बिजली कंपनी की लापरवाही मानी जा रही है। नई व्यवस्था को लागू तो कर दिया लेकिन कहीं भी बेहतर तरीके से बताया नहीं गया नही बेहतर प्रचार किया गया। इसी कारण लोग इसे समझ नहीं पाए। हालांकि इतने सारे सेंटर खोलने के बाद भी काउंटर्स और दफ्तर में काम में कोई कमी नहीं आई है।
पहले सप्ताह बंद रखा, फिर खोल दिया काउंटर
विभाग की मंशा थी कि लोग डिजिटली पैमेंट करें। ऑनलाइन भुगतान की भी व्यवस्था हमारे यहां है लेकिन सीएससी सेंटर्स को लोग समझ नहीं पाए और मजबूरन हमें कुछ दिन बाद मैनुअल काउंटर खोलना पड़ा।
-भानु तिवारी, एई, एमपीईबी, ब्यावरा