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ब्रेकिंग न्यूज बनकर रह गया चार माह में भोपाल-ब्यावरा रोड बनाने का दावा

31 जनवरी को केंद्रीय भूतल-परिवहन मंत्री गडकरी भूमिपूजन करने के बाद भी आज तक शुरू नहीं हुआ निर्माण

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ब्यावरा/रायगढ़। देवास-शिवपुरी फोरलेन के भूमि-पूजन के दौरान किया केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का दावा ब्रेकिंग न्यूज ही बनकर रह गई है। चार माह के दावे में सालभर बाद भी भोपाल-ब्यावरा रोड का काम जमीनी स्तर पर शुरू नहीं हो पाया है।

दरअसल, भोपाल रोड को लेकर तमाम तरह की स्वीकृति, टेंडर प्रक्रिया हो जाने के बावजूद लेटलतीफी होती ही जा रही है। अब तमाम खानापूर्ति, कागजी कार्रवाई के बावजूद दिल्ली मंत्रालय से निर्माण एजेंसी सीडीएस को फाइनेंशियल स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इसके चलते चार माह तो दूर सालभर बीतने को है अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। जिले से केंद्र तक भाजपा शासित सरकार होने और तमाम तरह के विकास कार्यों को आसानी से गति मिलने के बावजूद अभी तक उक्त रोड की नींव नहीं रखी जा सकी है। बता दें कि 31 जनवरी 2017 को रेस्ट हाउस तिराहे पर हुई फोरलेन के भूमि-पूजन के दौरान केंद्रीय भूतल-परिवहन मंत्री गडकरी ने मंच ठोक-ठोक कर यह दावा किया था कि मीडिया वाले नोट कर लें, यदि चार माह में काम न हो और वादे पूरे न हो तो ब्रेकिंग न्यूज बनाकर छाप देना। हालात यह है कि वाकई में उक्त रोड अब ब्रेकिंग न्यूज बनकर ही रह गई है। सामान्य सी स्वीकृतियों के चलते अभी तक काम को गति नहीं मिल पाई है।

1086 करोड़ से बनना है भोपाल रोड
दिल्ली की सीडीएस (सेंट्रो डॉरस्ट्रॉय) कंपनी को उक्त प्रोजेक्ट का जिम्मा मिला है। इसमें 1086 करोड़ से उक्त रोड का काम होना है। लालघाटी से मुबारकपुर जंक्शन के आठ किमी हिस्से के लिए 303.80 करोड़ और बाकी के 97.33 किमी (मुबारकपुर जंक्शन से ब्यावरा) तक के लिए 782.68 करोड़ रुपए की लागत तय की गई है। जून-2020 तक इससे बनाने का लक्ष्य है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं होने से तमाम तरह के काम पर सवाल उठने लगे हैं।

31 जनवरी 17 को ईपीसी मोड में रोड को मंजूरी।
18 मार्च को 17 को 898 करोड़ की विभागीय स्वीकृति।
01 सितंबर 17 को दिल्ली से फाइनल स्वीकृति मिली।
08 सिंतबर 17 को जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू।
14 अक्टूबर 17 को प्रोजेक्ट फाइल दिल्ली जाकर फिर से अटकी।
27 अक्टूबर 17 को सीडीएस कंपनी के नाम टेंडर खुला।
तभी से आज तक अब फाइनेंशियल स्वीकृति पर प्रोजेक्ट अटक गया है।

हम विभाग से इस बारे में विस्तार से बात करेंगे, दोबारा उन्हें रिमाइंड करवा देंगे। यदि जरूरत पड़ी तो दिल्ली जाकर उक्त रोड का काम दिखवाएंगे। उक्त प्रोजेक्ट को लेकर कोई लेटलतीफी नहीं की जाएगी।
-रोड़मल नागर, सांसद, राजगढ़

कब तक स्वीकृति मिलेगी कुछ कहा नहीं जा सकता। दिल्ली से ही फाइनेंशियल स्वीकृति अटकी हुई है। टेंडर फाइनल हो चुका है,लेकिन एग्रीमेंट में आगे की प्रक्रिया में लेटलतीफी हायर लेवल से ही है। अब नये वर्ष में ही काम शुरू होने की संभावना है।
-एमएल पुरबैया, रीजनल मैनेजर, एनएचएआई (पीआईयू), भोपाल