
राजगढ़। जीरापुर जनपद की बांसखेड़ी पंचायत अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई, लेकिन इस पंचायत में अनुसूचित जाति का कोई मतदाता नहीं था। ऐसे में बालू सिंह गुर्जर ने पुत्री मांगीबाई का जाति प्रमाण पत्र एसडीएम कार्यालय राजगढ़ से तैयार करवाया।
प्रमाण पत्र को लेकर जब कलेक्टर से शिकायत हुई और कलेक्टर हर्ष दीक्षित के निर्देशों पर पूरे मामले की जांच कराई तो पाया कि मांगी बाई के तैयार प्रमाण पत्र में एसडीएम के हस्ताक्षर ही फर्जी हैं। इस कारण 6 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के साथ ही कुछ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी दिए गए। इसके साथ ही तैयार प्रमाण पत्र को एसडीएम ने निरस्त कर दिया। पर निरस्ती से पहले ही मांगी बाई सरपंच पद के लिए अपना आवेदन जमा कर चुकी थी।
सारा मामला जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक की जानकारी में होने के बाद भी इस आवेदन को जीरापुर आरओ ने स्वीकार कर लिया। 10 जून को जब नामांकन वापसी की अंतिम तारीख थी और पूरा समय निकल जाने के बाद मांगी बाई ने जो आवेदन चुनाव लड़ने के लिए दिया उसे मान्य कर लिया और अब बांसखेड़ी ग्राम पंचायत से मांगी बाई निर्विरोध सरपंच चुन ली गईं हैं।
जबकि एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर से तैयार प्रमाण पत्र को एसडीएम पहले ही निरस्त कर चुकी हैं। ऐसे में सवाल उठता है क्या इस पूरे मामले में जानबूझकर पूरी रूपरेखा रची गई या फिर निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत इस पूरी प्रक्रिया को संपन्न कराया गया। बात जो भी हो लेकिन जिस तरह से फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर किसी ग्राम पंचायत का सरपंच निर्विरोध चुन लिया गया हो।
इधर, फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद एसडीएम ने कहा कि मैंने कोतवाली में फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई है। जबकि टीआई ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई आवेदन ही नहीं आया, न ही कोई एफआइआर दर्ज हुई है। कुल मिलाकर सब तरफ गड़बड़झाला ही चल रहा है। वहीं, अब आपत्तिकर्ता न्यायालय और निर्वाचन आयोग की शरण लेने की तैयारी में है।
मामला सभी के संज्ञान में होने के बाद भी निर्विरोध सरपंच बन गईं...
यह मामला पहले से ही हाईलाइट हो चुका था और सभी की जानकारी में था। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई। बता दें कि लिंबोदा गांव जहां मांगी बाई का ननिहाल है वहां मांगी बाई को कोई नहीं जानता।
जबकि बांसखेड़ी में मांगी बाई को कोई अनुसूचित जनजाति के नाम से नहीं जानता इस तरह के बयान भी लिए गए हैं, लेकिन क्या कारण है कि मांगी बाई को फर्जी तरीके से तैयार किए गए जाति प्रमाण पत्र के बाद भी निर्विरोध चुने जाने का इंतजार किया जाता रहा।
क्या है जाति का मामला
आवेदिका मांगी बाई बांसखेड़ी के कालाखेड़ा गांव की रहने वाली है। उनकी मां अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखती है लेकिन उनका विवाह बांस खेड़ी के बालू सिंह गुर्जर के साथ हुआ था। जो पिछड़ा वर्ग में आते हैं। जबकि मांगीबाई का लिम्बोदा में रहने वाला परिवार अनुसूचित जनजाति का है।
ऐसे में जब बांसखेड़ी में सरपंच के पद का आरक्षण अनुसूचित जनजाति का हुआ तो वहां अनुसूचित जनजाति के मतदाता नहीं मिल रहे थे यही कारण है कि मांगीबाई के पिता बालू सिंह गुर्जर और उसके साथ ही सागर सिंह सोंधिया लिंबोदा गांव जोकि राजगढ़ के अंतर्गत आता है एसडीएम कार्यालय पहुंचकर जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोक सेवा केंद्र में कर्मचारी रामदयाल तंवर से संपर्क किया, और नामांकन भरने की अंतिम तारीख 6 जून से पहले जाति प्रमाण पत्र बनवाने का तरीका पूछा।
इसके बाद कर्मचारी बालू सिंह को लोक सेवा केंद्र की ओर से एसडीएम कार्यालय में बैठने वाले निलेश गुप्ता के पास लेकर गए जहां नीलेश ने एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए यह जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया। मांगीबाई का जो प्रमाण पत्र बनवाया गया उसके लिए जो दस्तावेज तैयार किए गए, उनमें मांगीबाई के पति के स्थान पर उनके पिता बालू सिंह का नाम दर्ज है।
वापस भिजवाया प्रस्ताव
एफआइआर से जुड़ा हुआ जो प्रस्ताव यहां आया था। उसमें किसी तरह के दस्तावेज नहीं लगाए गए थे, इसलिए मैंने उनका आदेश वापस भिजवा दिया था। दस्तावेज और तमाम तरह के कथन मंगवाए गए हैं। एफआइआर को लेकर तमाम दस्तावेज जरूरी होते हैं।
- कमलचंद्र नागर, एडीएम, राजगढ़
निर्विरोध निर्वाचित हुईं
हमारे पास आवेदक के किसी भी तरह के दस्तावेज को जांच करने का न समय होता है ना ही ऐसा नियम में है इसलिए नामांकन जमा किया गया था। उसे मान्य कर लिया है अब मांगी बाई निर्विरोध सरपंच चली गई हैं।
- एआर चिरामन, तहसीलदार, जीरापुर
एफआइआर दर्ज कराई
मेरे फर्जी हस्ताक्षर से बगैर जांच किए जारी किए गए प्रमाण पत्र को मैंने निरस्त कर दिया था। महिला निर्विरोध चुनी गई है, इसकी जानकारी लेनी पड़ेगी। विभाग के लिए इन लोगों ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में सहयोग किया। उन सभी के खिलाफ मैंने राजगढ़ कोतवाली में एफआइआर दर्ज करा दी है।
- जूही गर्ग, एसडीएम, राजगढ़
आवेदन नहीं आया
कोतवाली में किसी तरह का कोई आवेदन नहीं आया है, ना ही इस मामले में अभी तक एफआइआर दर्ज हुई है।
- उमेश यादव, थाना प्रभारी राजगढ़
Published on:
12 Jun 2022 04:19 pm
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