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ये कैसा मॉडल स्कूल… समय पर नहीं खुला, परीक्षा देेने आए छात्र धूप में बैठे रहे

हाल-ए-सरकारी education system... आखिर कब सुधरेगा ये ढर्रा ब्यावरा sub division का एक मात्र मॉडल स्कूल, दर्जनभर staff फिर भी अनदेखी, टेबल-कुर्सियों पर चढ़ी थी धूल शहर के नजदीक होने के बावजूद अनदेखी, चार कक्षाओं में परीक्षा दो शिक्षकों ने बांटे पेपर और कॉपियां

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ये कैसा मॉडल स्कूल... समय पर नहीं खुला, परीक्षा देेने आए छात्र धूप में बैठे रहे

-ब्यावरा.सुबह 8.30 बजे से परीक्षा थी, 8.12 बजे तक ऐसे लगा हुआ था ताला।

ब्यावरा.कहने को सरकारी education system को हाईटैक करने private schools की तर्ज पर सुविधाएं देने लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर डाले हैं लेकिन जमीनी स्तर पर अधीनस्थ कर्मचारी इसे पलीता लगाने में लगे हैं। आखिरकार क्यों governmet schools की image अच्छी हो जाए, यह सिस्टम का हिस्सा माना जाने वाले teachers ने ठान लिया है।
दरअसल, शहर से लगे हुए सब-डिविजन के एक मात्र मॉडल स्कूल में सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है। खुद का निजी स्कूल संजोने, कोचिंग क्लासेस चलाने जिम्मेदार अपना काम भूल गए हैं। यहां का स्टॉफ अपने काम के प्रति इस कदर बेपरवाह है कि जैसे किसी से कोई लेना-देना ही नहीं हो। गुरुवार को स्कूल में 9 और 11वीं की exam थी। 8.30 बजे से शुरू होने वाली परीक्षा के लिए 8.12 तक भी स्कूल नहीं खोला गया। परीक्षार्थी बाहर बैठकर ही इंतजार करते रहे। धूप में समूह बनाकर वे बैठे रहे। इसके बाद एक शिक्षिका चाबी लेकर आईं, तब स्कूल खुल पाया।

करीब दर्जनभर स्टॉफ वाले इस मॉडल स्कूल में किसी जिम्मेदार शिक्षक को यह परवाह नहीं रही कि कम से कम समय पर स्कूल खोल दिया जाए। अनदेखी यहीं खत्म नहीं होती। सभी बच्चों चार अलग-अलग कक्षों में बैठा दिया गया, महज दो शिक्षक-शिक्षिकाओं ने ही उन्हें पेपर और कॉपियां वितरित किए। पहले कॉपियां दी गईं और समय ज्यादा हो जाने के काफी देर बाद जब पेपर आए तब वे बांटे गए। साढ़े आठ बजे के बाद भी वहां का पूरा स्टॉफ स्कूल में नहीं पहुंच पाया।आखिरी बार कब साफ हुए थे पता नहीं... टेबल-कुर्सियों पर चढ़ी थी धूल
कहने को उत्कृष्ट सुविधाओं और शासन के रिकॉर्ड में बेहतर परफॉर्मेंस वाले स्कूलों में शामिल मॉडल स्कूल में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। छात्रों का कहना है कि यहां समय पर सफाई नहीं होती। आखिरी बार कब यहां झाडू लगी थी, कब सफाई हुई थी यह किसी को नहीं पता। टेबल कुर्सियों पर इस कदर धूल चढ़ी थी कि बैठने पर कपड़े खराब हो जाएं, बावजूद इसके परीक्षार्थियों ने बैठकर परीक्षा दी। कुल मिलाकर शासन के इतने महत्वपूर्ण स्कूल में सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है, जिससे बड़े-बड़े दावे करने वाला शिक्षा विभाग कोसों दूर है, पूरी तरह से अछूता है।

चपरासी खुद को बताता है सांसद का रिश्तेदार, आता ही नहीं
कहने को मॉडल स्कूल में कुछ भी मॉर्डन-मॉडल नहीं है। सब कुछ वही दिखा जो सरकारी ढर्रे के हिसाब से सरकारी स्कूलों में रहता है। यहां अस्थाई तौर पर एक चपरासी नियुक्त कर रखा है वह भी समय पर नहीं आता। स्कूल स्टॉफ और बच्चों ने बताया कि वह सफाई तो कभी करता ही नहीं है। खुद को सांसद का रिश्तेदार बताकर रौब झाड़ता है और काम नहीं करता। इसे लेकर शिक्षा विभाग के कर्मचारी और विद्यार्थी भी परेशान है, उन पर भी वह दबाव बनाता है। वहीं, मौजूदा दो शिक्षकों का कहना था कि हमारे कुछ साथी (तीन से चार) की ड्यूटी मूल्यांकन में लगी है, इसलिए समय पर नहीं आ पाए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि दर्जनभर स्टॉफ में से क्या सिर्फ दो ही लोगों को जिम्मा इस परीक्षा का था?
यह गलत है, स्पष्टीकरण मांगा जाएगा
हालांकि हमारा कुछ स्टॉफ मूल्यांकन में लगा है, लेकिन हम संबंधितों से स्पष्टीकरण मांगेंग। यह वाकई बेहद गलत बात है। जिसकी भी अनदेखी इसमें आएगी हम नोटिस देकर लिखित जवाब मांगेंगे। नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
-बी. एस. बिसारिया, जिला शिक्षा अधिकारी, राजगढ़