
2019 में ऑनलाइन हुई, इससे पहले हितग्राहियों के साथ रुपए निकाल लिए वेयर हाउस के रुपए,2019 में ऑनलाइन हुई, इससे पहले हितग्राहियों के साथ रुपए निकाल लिए वेयर हाउस के रुपए,2019 में ऑनलाइन हुई, इससे पहले हितग्राहियों के साथ रुपए निकाल लिए वेयर हाउस के रुपए
ब्यावरा. शासन स्तर पर अनुदान योजना के तहत मुहैया करवाए गए प्याज के वेयर हाउस में और भी गड़बडिय़ां हुई है। उद्यानिकी के मौजूदा और तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारियों ने मिलीभगत कर हितग्राहियों से ही सेटिंग कर ली और वेयर हाउस के नाम पर लाखों रुपए निकाल लिए।
दरअसल, वर्ष-2019 में पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था प्याज के वेयर हाउस के लिए की गई। इससे पहले यह व्यवस्था मैनुअली थी, विभाग अपने स्तर पर केस अलॉट करता था और अपने स्तर पर ही राशि जारी करवा लेता था। वर्तमान में 50 मीट्रिक टन के लिए 01 लाख 75 हजार रुपए के अनुदान की योजना है, जिसमें करीब साढ़े तीन लाख रुपए खर्च करना होते हैं। इन वेयर हाउस को बनना दर्शाकर उद्यानिकी के अधिकारियों ने बड़ा बड़बड़झाला किया है। यह बात इससे स्पष्ट हुई कि जहां विभाग वाले वेयर हाउस बनना बता रहे हैं वहां के हितग्राहियों के यहां वेयर हाउस के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगी। जब उनसे बात की जा रही है तो वे न बात करने को तैयार हैं न ही बनने वाला भवन बता पा रहे हैं। यानि कुल मिलाकर हितग्राहियों से ही आधी-आधी राशि की सेटिंग कर उद्यानिकी में लाखों रुपए की गड़बड़ी की गई और बड़ी आसानी से उस पर पर्दा डाल दिया गया। हालांकि बचने के लिए विभाग वालों ने कुछ चुनिंदा वेयर हाउसेस बनवा दिए जिन्हें दिखाया जा सके, लेकिन उनमें भी कई हितग्राहियों को राशि नहीं मिल पाई।
विभाग के जिम्मेदार घबराए, सफाई देने लगे
पत्रिका में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी घबराए हुए हैं। वे तरह-तरह की सफाई देने में जुटे हैं, उन्हें लगता है कि वे पूरी तरह से सही हैं, ऐसे में स्पष्टीकरण दे रहे हैं और उनका तर्क है कि हम तो आपको सूचियां दे सकते हैं और जानकारी भी मुहैया करवा सकते हैं। इससे पहले किसने बनाया नहीं बनाया ये अलग बात है। हम सिर्फ हमारी बात कर रहे हैं। यानि कुल मिलाकर जिलेभर में बने वेयर हाउसेस को लेकर गड़बडिय़ां हुई हैं जिनकी शासन स्तर पर जांच होना बेहद जरूरी है। उल्लेखनीय है कि यदि नियमानुसार ३७९ वेयर हाउस पूरे जिले में बने होते तो किसानों को अपनी प्याज औने-पौने दाम (दो से तीन रुपए किलो) में नहीं बेचना पड़ती। अब जांच से घबराए हुए जिम्मेदार तमाम प्रकार की सफाई देने में लगे हैं।
पूरी सूचियां दे देंगे
मैं तो अभी आया हूं, इससे पहले क्या हुआ कुछ बता नहीं सकते। हमारे आने के बाद जितने बने हैं, उसकी सूचियां दे सकता हूं। फिर बी कहीं दिक्कत होगी किसी हितग्राही को तो हम बात करेंगे।
-पी. आर. पांडे, उप-संचालक, उद्यानिकी, राजगढ़
Published on:
05 Jan 2020 01:33 pm
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