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देवास और मंदसौर के साथ ही राजगढ़ भूमि विकास बैंक खत्म

भूमि विकास बैंक के कर्मचारियों को कॉपरेटिव बैंक में मर्ज करते हुए भूमि विकास बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है

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Employees will go to CCB, will also have to provide services outside the district

Rajgarh The Land Development Bank currently operates in this building.

राजगढ़. आर्थिक तंगी से जूझ रहे भूमि विकास बैंक के कर्मचारियों को कॉपरेटिव बैंक में मर्ज करते हुए भूमि विकास बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत प्राथमिक तौर पर उसका सामान नीलाम किया जा रहा है।
शासन से हुए आदेशों के बाद राजगढ़ जिले के साथ ही यह प्रक्रिया देवास और मंदसौर जिले में भी अपनाई जा रही है। ऐसे में कुछ कर्मचारियों को जिले के ही सीसीबी में मर्ज किया जा रहा है। जबकि कुछ कर्मचारियों को जिले से बाहर भी स्थानांतरण कर अन्य जगह सेवाओं के लिए भेजा जा रहा है। इस बड़ी बैंक के खत्म होने से जिले के कई कर्मचारी प्रभावित होंगे वहीं करोड़ों रुपए डूबने की भी संभावना जताई जा रही है।

कभी जिले में सबसे अधिक शाखाओं वाला बैंक कहे जाने वाला भूमि विकास बैंक जिसमें 23 शाखाएं थीं और जिले के हर कोने पर इसका लेनदेन व भारी ऋण किसानों को दिया जाता था। वर्ष 2000 के बाद यह बैंक दोजख में जाना शुरू हुआ। हालात यहां तक पहुंचे कि अब बैंक पर 76 करोड़ 56 लाख 29091 की रिकवरी है, जो विभिन्न जगह से लेनी है। लेकिन यह सारी वसूली नहीं आने से लंबे समय से कर्मचारी भी वेतन को लेकर परेशान रहे और कुछ ने नौकरी छोड़ दी तो कुछ दूसरे विभागों में चले गए। जबकि जिनके पास कोई सोर्स नहीं था वह इसी बैंक में सेवाएं दे रहे थे। लेकिन लगातार बैंक पर बढ़ते कर्ज से अब शासन ने यह निर्णय लिया कि इन कर्मचारियों को सहकारिता बैंक में मर्ज करते हुए भूमि विकास बैंक को बंद कर दिया जाए।
वेतन का बढ़ सकता है भार
यूं तो सहकारी बैंक कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा था, लेकिन भूमि विकास बैंक के जिलेभर के कर्मचारियों को एक साथ कॉपरेटिव में पहुंचाने से अब यहां कर्मचारियों की संख्या ज्यादा बढ़ गई है। इनमें 21 तो सिर्फ भृत्य हैं। जबकि लगभग 55 कर्मचारी लिपिकीय वर्ग से हैं। बड़ी संख्या में एकाएक कर्मचारियों को सहकारिता बैंक में मर्ज करने से लगभग हर साल डेढ़ से तीन करोड़ तक का भार बढ़ सकता है।
नीलाम हो रही सामग्री
विभिन्न बैंकों से आए फ र्नीचर को बैंक के ही कर्मचारियों द्वारा शासन के आदेश के बाद नीलाम किया जा रहा है। इसमें अलमारी, कुर्सी, टेबल आदि शामिल हैं। इतना ही नहीं कुछ ऐसी सामग्री भी जो किसानों से राशि वसूलने के चक्कर में सामान ही उठा लिया गया। ऐसे पानी के मोटर पंप भी नीलाम किए जा रहे हैं, ताकि कुछ हद तक इस सामग्री से राशि एकत्रित की जाए।