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छुरिया बीएमओ कार्यालय से 50 मीटर की दूरी में मरीजों के जीवन से खिलवाड़, कार्रवाई के नाम पर किया ऐसा कुछ कि हंस रहें लोग

राजनांदगांव में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उदासीनता मरीजों पर भारी पड़ रही है। अस्पतालों की बात छोडि़ए जिले में खुले मेडिकल स्टोर से लेकर नर्सिंग होम और पैथोलॉजी तक में मानकों को पूरा किए बिना ही संचालन किया जा रहा है। बीएमओ से लेकर सीएमएचओ की जिम्मेदारी इनका नियमित निरीक्षण कर व्यवस्था बनाना है।

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छुरिया बीएमओ कार्यालय से 50  मीटर की दूरी में मरीजों के जीवन से खिलवाड़, कार्रवाई के नाम पर किया ऐसा कुछ कि हंस रहें लोग

छुरिया बीएमओ कार्यालय से 50 मीटर की दूरी में मरीजों के जीवन से खिलवाड़, कार्रवाई के नाम पर किया ऐसा कुछ कि हंस रहें लोग

Rajnandgaon news स्वास्थ्य विभाग की निगरानी के अभाव में शहर सहित जिले भर में मेडिकल सेवाओं का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। बिना लाइसेंस के सोनोग्राफी, क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला जिला मुख्यालय से लगभग 47 किलोमीटर दूर छुरिया नगर में सामने आया है।
यहां ब्लड कलेक्शन सेंटर के नाम पर लाइसेंस लेकर शिवम मिनी पैथोलॉजी में सोनोग्राफी, डायग्नोस्टिक और क्लीनिक का संचालन किया जा रहा था। शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है। इसके अलावा ब्लड जांच का लाइसेंस भी एक्सपायर पाया गया है। लाइसेंस रिनीवल कराने की समझाइश देकर जांच बंद कराया गया है।
शिकायत के बाद बीएमओ डॉ. रागिनी चंद्रे ने मेडिकल ऑफिसर भेजने की बात कही। एक घंटे बाद छुरिया मेडिकल ऑफिसर डॉ. चंद्रशेखर वर्मा मौके पर पहुंचे। जानकारी अनुसार छुरिया बीएमओ डॉ. चंद्रे छुरिया सरकारी क्वार्टर में नहीं रहती हंै, वे डोंगरगांव से आवागमन करती हैं, जो कि शासकीय सेवा नियमों का उल्लंघन है।
कार्रवाई करने के बजाए खानापूर्ति
जब तक मेडिकल ऑफिसर डॉ. वर्मा पैथोलैब में पहुंचे, तब तक संचालक ने सोनोग्राफी से संबंधित सबूत मिटा दिए थे और सामानों को हटा दिया था। यहां तक की दीवारों पर चस्पा पोस्टर भी फाड़ दिए। शिकायत के घंटे भर बाद पैथोलैब पहुंचे मेडिकल ऑफिसर डॉ. वर्मा कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते नजर आए। जबकि वहां पर गायनोलॉजिस्ट डॉ. मिताली द्वारा ओपीडी लेने का प्रमाण स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। खुद डॉ. मिताली वहां मौजूद थीं। इसके बावजूद मेडिकल ऑफिसर ने सिर्फ चेतावनी देकर मामले को रफा-दफा कर दिया, जबकि नियमत: बिना लाइसेंस के क्लीनिक संचालन के कृत्य में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
बीएमओ की कार्यशैली पर सवाल
इस मामले में शिकायत मिलने के बाद भी बीएमओ डॉ. चंद्रे की ओर से जांच में देरी करना अपने आप में ही कई सवालों को जन्म दे रहा है। हैरत की बात यह है कि शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से महज 40 कदम की दूरी पर संचालित इस लैब पर आज तक बीएमओ की नजर नहीं पड़ी? या फिर जानबूझकर ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं की जा रही? यह जांच का विषय है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को जल्द से जल्द इस मामले को संज्ञान में लेना चाहिए और शहर सहित जिले भर में संचालित अवैध पैथोलैब, डायग्नोस्टिक सेंटर, सोनोग्राफी सेंटर और क्लीनिक संचालकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

वर्जन...
शिकायत पर जांच की गई है। जांच में ब्लड जांच का लाइसेंस एक्सपायरी पाया गया, तो समझाइश देकर फिलहाल जांच बंद करने कहा है। लाइसेंस रीनिवल के बाद ही जांच करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. रागिनी चंद्रे, बीएमओ छुरिया