
नेपाल का केला अब राजनांदगांव में, किसान ने गोबर खाद से तैयार की औषधीय गुणों से भरपूर मालभोग केले की फसल
राजनांदगांव. शहर के कृषक मनोज चौधरी बांकल में अलग किस्म के केले की खेती कर रहे हैं। आमतौर पर नेपाल की सीमा में काली नदी की घाटी पर उपजने वाले मालभोग केले के एक पौधे से शुरू की गई यह खेती आज साढ़े तीन एकड़ में फैल चुकी है। राजनांदगांव शहर के कृषक मनोज चौधरी ने अपने अथक प्रयास के चलते लगभग 8 वर्षों में शहर के समीप बाकल में केले की देशी पद्धति से खेती तैयार की हैं।
सिर्फ गोबर खाद का किया प्रयोग
यहां केले की लगी वैरायटी की खास बात यह है कि माल भोग किस्म का यह केला अमूमन नेपाल सीमा से लगी काली नदी घाटी क्षेत्र में होता है। इस केले पर शोध करते हुए उन्होंने बिहार से केले का एक पौधा लाकर उसे बिना रसायनिक खाद के तैयार किया और महज गोबर खाद का उपयोग करते हुए एक पौधे से शुरू की गई खेती को साढ़े तीन एकड़ केले की फसल में तैयार कर लिया। उन्होंने अपने केले की खेती में केवल गोबर खाद का प्रयोग कर यह बदलाव महसूस किया कि यह केला आम केला से काफी मीठा है।
खेतों में पहुंचकर ले रहे लोग
कृषक मनोज चौधरी ने कहा कि उनके मित्र के माध्यम से उन्हें माल भोग केले का एक पौधा मिला था। अब यह पौधा एक से अनेक होकर लगभग साढ़े 3 एकड़ में फैल चुका है। बिना किसी रासायनिक खाद व दवाइयों के महज गोबर खाद से तैयार होने की वजह से इस केले का स्वाद भी आम केलों से अलग है। इस केले की फसल तैयार होते ही जानकार लोग खेतों तक पहुंचकर किलो की खरीदी कर लेते हैं।
मलाई केला के नाम से बिकता है बाजारों में
यह केला आम केलों के मुकाबले छोटा है लेकिन इसके गुण आम केलों से कहीं ज्यादा दिखाई देते हैं। यहां केला औषधीय गुणों से भी भरपूर है कहा जाता है कि पेट दर्द बुखार और डायरिया में यह केला लाभदायक है। कई बार बाजार में दुकानदारों को मलाई केला कहते सुना जाता है जिससे यह पता चलता है कि इस मालभोग केले के लिए ही मलाई केला शब्द कहा गया होगा।
Published on:
07 Aug 2021 05:36 pm
बड़ी खबरें
View Allराजनंदगांव
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
