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खेतों के सिपाही सड़कों पर, वेतन-पदोन्नति को लेकर गरजे कृषि पर्यवेक्षक

राजसमंद जिले में सोमवार को खेत-खलिहानों के विकास को कंधों पर ढोने वाले कृषि पर्यवेक्षक खुद अपनी समस्याओं के बोझ से हलकान होकर सड़कों पर उतर आए।

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Krashi vibhag

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राजसमंद. राजसमंद जिले में सोमवार को खेत-खलिहानों के विकास को कंधों पर ढोने वाले कृषि पर्यवेक्षक खुद अपनी समस्याओं के बोझ से हलकान होकर सड़कों पर उतर आए। वर्षों से वेतन विसंगति और पदोन्नति जैसे मुद्दों में उलझे पर्यवेक्षकों ने इस बार साफ कह दिया -अब और नहीं!

सहायक निदेशक कार्यालय पर डटा मोर्चा

कृषि पर्यवेक्षक समन्वय समिति, राजसमंद के बैनर तले जिलेभर से आए पर्यवेक्षकों ने सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय के बाहर एक दिवसीय धरना दिया। किसी ने हाथ में बैनर थामा था, तो कोई अपनी पीड़ा पोस्टर पर लिखकर लाया था। नारों के बीच साफ संदेश-मांग पूरी करो, वरना आंदोलन और तेज होगा!

11 सूत्रीय मांगों की गूंज

  • धरना स्थल पर समिति ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को खुलकर रखा
  • सातवें वेतन आयोग में हुई विसंगतियां खत्म हों।
  • हर ग्राम पंचायत में कृषि पर्यवेक्षक पद स्वीकृत हो।
  • ऑनलाइन कामों के लिए रिचार्ज भत्ता और अतिरिक्त चार्ज भत्ता मिले।
  • कार्यालय संचालन के लिए स्टेशनरी भत्ता तय हो।
  • कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी का अनुपात 4:1 रखा जाए।
  • पंचायत समिति स्तर पर दो सहायक कृषि अधिकारी और आठ कृषि पर्यवेक्षक पद सृजित हों।
  • पदोन्नति कोटा बढ़ाकर 75% किया जाए।

धरना स्थल बना चर्चा का चौपाल

धरने में जिलेभर से आए वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी और समिति पदाधिकारियों ने अपनी आवाज बुलंद की। मथुरालाल कुमावत, सोहन प्रकाश कुमावत, मनोहर शंकर आचार्य, लोभ चंद्र लोहार, मीना रेगर, पूरणमल कुमावत, फतह लाल कुमावत, माया तेली, ललिता, सुमन पलिया, मनीष कुमार, पंकज लोकेश मीणा, फोरूलाल मीणा सहित बड़ी संख्या में कृषि प्रहरी धरना स्थल पर डटे रहे।

ज्ञापन देकर दी चेतावनी

धरना खत्म होने के बाद समिति प्रतिनिधियों ने सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। साथ ही दो टूक चेतावनी दी —

  • "अगर इस बार भी मांगे कागजों में दब गईं तो अगली बार आंदोलन का स्वर और तीखा होगा!"
  • अब सवाल: खेतों को सींचने वाले कब तक यूं तरसेंगे?

सवाल बड़ा सीधा है जो पर्यवेक्षक किसानों को नई तकनीक, नई बीज योजना, उन्नत खेती और सरकार की योजनाओं से जोड़ते हैं, उनके लिए कब तक बेसिक भत्तों, वेतन और पदोन्नति का इंतजार रहेगा?, धरना स्थल पर उठी यह आवाज अब कागजों में नहीं दबनी चाहिए - यही मांग है खेतों के सिपाहियों की!