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अपने बेटे की आखिरी अगवानी का रतजगा करता रहा बिनोल

खूब याद आएगा पुलवामा का शहीद, नारायण की कुर्बानी पर मेवाड़ है गर्वित, जगह-जगह गूंजे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे

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अपने बेटे की आखिरी अगवानी के रतजगे में सो न सका बिनोल

राजसमंद/कुंवारिया. बिनोल के लाडले नारायणलाल गुर्जर की शहादत पर पूरा गांव गम और गुस्से में तो है ही, इस बलिदान पर गांव वालों की छाती भी गर्व से फूली हुई है। शुक्रवार की सुबह मेवाड़ की फिजाओं में आक्रोश पसर गया। पुलवामा के आतंकियों से बदले का इरादा और शहादत की बलिवेदी पर चढ़े नारायणलाल की शख्सियत के किस्सों का सिलसिला रुक नहीं रहा। गांव का बच्चा-बूढ़ा लहू में रंगे अपने बेटे को आखिरी बार देखने को बेताब है। लोग उनकी अगवानी को एक शहादत का जश्न का रूप देने की तैयारी में जुटे थे। फूलों की बारिश और बैण्ड-बाजों पर देशभक्ति धुनों से आज शहादत दिवस मनाने का जुनून सवार है। एक तरफ देशभक्ति का ज्वार उमड़ा है, तो दूसरी तरफ अपने सबसे लाडले बेटे को खोने के गम और उसकी आखिरी अगवानी और विदाई में बिनोल गांव पूरी रात सो नहीं सका।
आतंकी हमले में सीआरपीएफ की 118वीं बटालियन में तैनात राजसमंद जिले के कुंवारिया क्षेत्र के बिनोल निवासी हैड कांस्टेबल नारायणलाल गुर्जर के शहीद होने पर हर शख्श की आंखें नम थीं। हर व्यक्ति उनकी राष्ट्रभक्ति से प्रभावित होकर शहादत को सलाम करता नजर आया। सूचना मिलते ही काफी संख्या में ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ता बिनोल पहुंच गए। अपने हाथों से जो भी सेवा या सहयोग हो सका, उसे देने में तत्पर नजर आए।


हमला होते ही परिवार में बेचैनी
परिजनों ने बताया कि गुरुवार को हमला होने की खबर आते ही पूरे परिवार को बेचैनी होने लगी व अनजान डर सताने लगा। रात को दूरभाष पर नारायणलाल के हमले में लापता होने की जानकारी मिलते ही सरपंच सोहनी देवी गुंजल, भंवरलाल गुंजल, गोवर्धनलाल गुर्जर, नाथूलाल गुर्जर, रामलाल गुर्जर आदि तुरन्त घर पहुंचे और परिवार को धैर्य बनाए रखने को कहा। सुबह उनकी मौत की पुष्टि होते ही पूरे गांव में मातम पसर गया।


यह है परिवार
नारायण के परिवार में माता-पिता का देहांत हो चुका है। पत्नी मोहनी देवी (36), पुत्री हेमलता (17) और पुत्र मुकेश (11) हैं। एक भाई गोवद्र्धनलाल, काका रामलाल गुर्जर के अलावा अन्य रिश्तेदार हैं।


तीन दिन पहले ही ज्वॉइन की ड्यूटी
परिजनों ने बताया कि नारायणलाल छुट्टियां मनाने गांव आए थे। गत 11 तारीख को वह रवाना हुए और 12 फरवरी को ड्यूटी ज्वॉइन की। आखिरी बार एक मित्र विनोद पालीवाल की शादी के भोज में दोस्तों के साथ शरीक हुए। गांव के बच्चों और युवाओं के नारायणलाल काफी चहेते थे। वह जब भी आते थे, मित्रों को फोन करके बुलाते थे और घंटों तक देशसेवा के लिए चर्चा करते थे।


सूचना मिलते ही पहुंचा पुलिस व प्रशासनिक अमला
उप पुलिस अधीक्षक दुर्ग सिंह, उपखण्ड अधिकारी खटीक, कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवकीनंदन गुर्जर, पूर्व जिला प्रमुख नारायण सिंह भाटी, गणेशलाल लाम्बोड़ी, विजयप्रकाश सनाढ्य, भगवत सिंह गुर्जर, जगदीश गुर्जर, कालूसिंह राठौड़, भारमल गुर्जर, दिग्विजय सिंह भाटी, पर्वत सिंह आशिया, प्रवीण पीपाड़ा, लक्ष्मण बंजारा सहित काफी संख्या में लोग पहुंचे तथा शोक-संवेदना व्यक्त की।


श्मशान पर समतलीकरण
प्रशासन ने बिनोल के श्मशान में एक्सक्वेटर से समतलीकरण करवाया। शाम तक पूरा परिसर तैयार कर दिया गया, जहां शनिवार सुबह राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार होगा। इधर, देर शाम तक शहीद की पार्थिव देह गांव में नहीं पहुंची। लोग सुबह से इंतजार कर रहे थे। लोग पुष्पांजलि के लिए भी बड़ी मात्रा में फूल और गुलाल लेकर पहुंचे।