
कुंभलगढ़ फोर्ट पर शौर्य, इतिहास और पर्यटकों का मेला, पत्रिका फोटो
मधुसुदन शर्मा
Khumbhalgarh Fort: राजसमंद जिले में बसा कुंभलगढ़ किला सिर्फ एक किला नहीं, बल्कि वीरता, वास्तुकला और प्रकृति का संगम है। इतिहास के पन्नों में राणा कुंभा की आन-बान-शान के प्रतीक इस किले ने पिछले चार सालों में अपनी दीवारों पर 12 लाख से ज्यादा देशी और 18 हजार से अधिक विदेशी पर्यटकों की चहलकदमी देखी है। यदि आंकड़ों को महीनों के हिसाब से देखें तो कुछ खास महीनों में सैलानियों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिलती है। जुलाई से दिसंबर तक के महीने सबसे व्यस्त रहते हैं। नवंबर और दिसंबर में विदेशी पर्यटकों का आंकड़ा सबसे ऊपर जाता है, जो कुंभलगढ़ की सर्दियों और उत्सवों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
यह भी दिलचस्प है कि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर विदेशी सैलानियों के लिहाज से सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले महीने साबित होते हैं। कारण साफ है कि किले में होने वाले मेलों, उत्सवों और ठंड के मौसम में जंगल सफारी का मजा। दीपक कुमार मीना संरक्षण सहायक, पुरातत्व विभाग ने बताया कि कुंभलगढ़ पर्यटकों की शेरगाह का प्रमुख स्थान बना है। जहां पर प्रतिवर्ष इनकी आवक में इजाफा हो रहा है।
कुंभलगढ़ किला मेवाड़ की आन-बान-शान का प्रतीक रहा है। महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित इस किले के चारों ओर करीब 36 किलोमीटर लंबी दीवार बनी हुई है, जिसे ‘ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है। इस दीवार की विशालता चीन की ग्रेट वॉल के बाद इसे दुनिया में दूसरा स्थान दिलाती है। किले से दिखाई देने वाला हरा-भरा अरावली का विस्तार और जंगल सफारी आज भी पर्यटकों को रोमांच से भर देता है।
कुंभलगढ़ सिर्फ एक किला नहीं, बल्कि राजस्थान के गौरव, अदम्य साहस और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हर साल लाखों सैलानियों के कदमों की चहलकदमी यह साबित करती है कि यहां का वैभव भविष्य में और अधिक विस्तारित होगा। कुंभलगढ़ में आने वाला हर पर्यटक अपने साथ यहां की यादें, किस्से और इतिहास का एक टुकड़ा लेकर लौटता है।
यहां की हरियाली, ऊंची पहाडिय़ां, घना जंगल और ऐतिहासिक वास्तुकला हर पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देती है। सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी सैलानियों के बीच भी कुंभलगढ़ का क्रेज तेजी से बढ़ा है। विदेशी मेहमान यहां सिर्फ किले को देखने नहीं आते, बल्कि वे यहां की लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और आदिवासी संस्कृति से भी रूबरू होते हैं।
वर्ष 2022 में, कुल 3,62,608 देशी और 2,133 विदेशी पर्यटक कुंभलगढ़ पहुंचे।
वर्ष 2023 में, देशी पर्यटकों की संख्या बढकऱ 4,38,582 हो गई और विदेशी सैलानी 6,565 तक पहुंच गए। यानी विदेशी पर्यटकों में तीन गुना से भी अधिक वृद्धि।
वर्ष 2024 में, देशी पर्यटकों की संख्या घटकर 3,56,343 रही लेकिन विदेशी सैलानियों का आंकड़ा 6,168 रहा, जो महामारी के बाद की रिकवरी का संकेत है।
2025 के शुरुआती छह महीनों में, अब तक 1,40,568 देशी और 3,758 विदेशी पर्यटक यहां आ चुके हैं। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह साल भी नया रिकॉर्ड बना सकता है।
कुंभलगढ़ में बढ़ता पर्यटन स्थानीय युवाओं और व्यवसायियों के लिए भी सुनहरा अवसर लेकर आता है। होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, ट्रेवल गाइड, लोक कलाकार, हस्तशिल्प विक्रेता, सबको इससे रोजगार मिलता है। पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों ने राजसमंद जिले में हजारों परिवारों की आजीविका को नया आधार दिया है। यही वजह है कि कुंभलगढ़ सिर्फ किले तक सीमित न रहकर एक सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर चुका है।
Published on:
22 Jul 2025 02:53 pm
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