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कुंवारिया(राजसमंद). राजसमंद जिले के झोर गांव की धरती अब नई खुशबू से महक रही है। जहां वर्षों से गेहूं, मक्का और चने जैसी पारंपरिक फसलें ही किसानों की पहचान थीं, वहीं प्रगतिशील किसान रामलाल खारोल ने अपनी मेहनत, प्रयोगधर्मिता और आधुनिक सोच से खेती की दिशा ही बदल दी। उन्होंने केसर और अश्वगंधा जैसी बहुमूल्य औषधीय फसलों की सफल खेती कर क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। आज राजसमंद की मिट्टी में लाल सोना कही जाने वाली केसर की खुशबू फैल रही है। रामलाल खारोल ने जिले में पहली बार अमेरिकन केसर (अडक केसर) और सिम पुष्टि अश्वगंधा की सफल पैदावार कर यह साबित कर दिया कि सही जानकारी और तकनीक से खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
जहां अधिकांश किसान पारंपरिक फसलों तक सीमित रहे, वहीं रामलाल ने कुछ नया करने का संकल्प लिया। इंटरनेट और कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेकर उन्होंने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी का अध्ययन किया तथा औषधीय खेती का प्रयोग शुरू किया। उनका मानना है खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सही फसल और सही तकनीक का खेल है।
आज उनके खेत में खिलते केसर के फूल और लहलहाती अश्वगंधा हर किसी का ध्यान आकर्षित कर रही है।
रामलाल खारोल बताते हैं कि उन्होंने खेती शुरू करने से पहले मिट्टी परीक्षण करवाया और रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद को प्राथमिकता दी।
आज झोर गांव में उनका खेत मॉडल फार्म बन चुका है। आसपास के गांवों से किसान उनकी खेती देखने और नई तकनीक सीखने पहुंच रहे हैं। उनकी पहल यह संदेश देती है कि औषधीय खेती अपनाकर किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं।
Published on:
21 Feb 2026 10:43 am
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