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राजसमंद. देश-दुनिया में मार्बल उद्योग के लिए पहचान बनाने वाला राजसमंद जिला, शिक्षा के क्षेत्र में आज भी बुनियादी सुविधाओं और अवसरों की कमी से जूझ रहा है। राजस्थान सरकार का आगामी बजट नजदीक है और जिले के युवाओं, अभिभावकों और शिक्षाविदों के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है- क्या इस बार राजसमंद की शिक्षा को प्राथमिकता मिलेगी, या यह जिला एक और बजट में पीछे रह जाएगा? सरकारी स्कूलों से लेकर आईआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों तक की दूरी राजसमंद में केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि संसाधनों, शिक्षकों और निवेश की खाई को उजागर करती है।
2011 की जनगणना के अनुसार राजसमंद जिले की कुल साक्षरता दर 63.14 प्रतिशत थी। इसमें
हालांकि हाल के वर्षों में, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में, साक्षरता दर में सुधार के संकेत मिलते हैं और 2021 के बाद यह आंकड़ा और बेहतर हुआ होगा, क्योंकि राजस्थान की औसत साक्षरता दर भी बढ़कर 67.06 प्रतिशत (2025 अनुमान) के आसपास पहुंच चुकी है। इसके बावजूद राजसमंद आज भी राज्य औसत से नीचे बना हुआ है।
राजसमंद के सैकड़ों सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं—
हालांकि पीएमश्री योजना के तहत जिले के कुछ स्कूलों का चयन हुआ है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सुविधाओं में अपेक्षित सुधार अभी दिखाई नहीं देता।
यह स्थिति तब है जब राज्य में रीट जैसी बड़ी शिक्षक पात्रता परीक्षाएं होती हैं, लेकिन उनकी नियुक्तियों का लाभ ज़मीनी स्तर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता।
राजसमंद के मेधावी छात्र आईआईटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे बड़े सपने देखते हैं, लेकिन—
जिले में करीब 10 हजार छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन बेहतर सुविधाएं न होने के कारण अधिकांश को अन्य जिलों और शहरों में जाना पड़ता है।
जिले में पॉलिटेक्निक कॉलेज मौजूद हैं, लेकिन—
सबसे बड़ी बात यह है कि राजसमंद में एक भी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं है। कौशल और तकनीकी शिक्षा का अभाव साफ नजर आता है। साथ ही जिला मुख्यालय पर विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल सुविधाओं की भी जरूरत महसूस की जा रही है।
इसके पीछे कई कारण सामने आते हैं—
जब तक शिक्षा बजट में ठोस और जिला-विशेष निवेश नहीं होगा, तब तक राजसमंद का छात्र केवल मेहनत के भरोसे आगे नहीं बढ़ पाएगा।
“राजसमंद जिले में उच्च और तकनीकी शिक्षा की दिशा में अभी बहुत कार्य किया जाना बाकी है। जिला मुख्यालय पर विज्ञान, वाणिज्य और कला वर्ग के सभी विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को बाहर न जाना पड़े। जिले के युवा खेलों में भी काफी प्रतिभावान हैं, इसलिए महाविद्यालयों में खेल सुविधाओं का विकास और खेल अधिकारियों की नियुक्ति जरूरी है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कौशल और तकनीक आधारित शिक्षा केंद्र भी खोले जाने चाहिए।
Published on:
18 Jan 2026 12:57 pm
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