
राजसमंद. प्रदेश में मानसून में होने वाली मुंहपका और खुरपका रोग से बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण कार्यक्रम प्रारंभ हो गया है। इसके तहत प्रदेश में 2.32 करोड़ से अधिक पशुओं के टीकाकरण किया जाएगा। पशुपालन विभाग की ओर से डोज उपलब्ध करा दी गई है। पशुपालन विभाग के चिकित्सक घर-घर जाकर पशुओं के टीकाकरण करेंगे। पशुपालकों के लिए पशुओं में मुंहपका खुरपका रोग को आर्थिक शत्रु कहा जाता है। इस रोग का टीकाकरण ही उपचार है। पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से प्रतिवर्ष बारिश से पहले पशुओं के टीकाकरण किया जाता है। पशुपालन विभाग की ओर मंगलवार से पशुओं में टीकाकरण करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इसके तहत आगामी 18 मई तक पशुपालन विभाग के चिकित्सक पशुपालकों के घर-घर जाकर पशुओं के टीकाकरण करेंगे। विभाग की ओर से प्रदेश में 2,32,94,290 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत राजसमंद में 4,03,630 पशुओं के टीकाकरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सरकार की ओर पशुओं के साल में दो बार टीकाकरण कराया जाता है, जिससे पशुपालक को किसी भी तरह से नुकसान नहीं हो।
खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) पशुओं का अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग है। इसमें पशुओं में बुखार आ जाता है। इसके बाद मुख्यत: मुंह और पैरों पर पुटिकाएं (फफोले) बन जाते हैं। मुंह से लार गिरने लग जाती है। खुरपका-मुंहपका रोग स्वस्थ पशुओं के बिना टीकाकरण किए हुए संक्रमित पशुओं के सम्पर्क में आने, पशुओं में दूषित चारे, दाने व पानी के सेवन, रोगी पशु की बिछावन के सम्पर्क में आने आदि से फैलता है।
उक्त बीमारी पशुपालकों को सर्वाधिक आर्थिक नुकसान पहुंचाती है। उक्त रोग से ग्रस्त होने पर पशुओं का वजन घट जाता है। उनके दूध उत्पादन के साथ ही प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। इस रोग से ग्रस्त होने पर पशुओं को वापस पुरानी स्थिति में आने में काफी समय लगता है। इसके कारण पशुपालकों को सर्वाधिक नुकसान होता है। विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई डोज निम्नलिखित है।
जिले में पशुओं के मुंहपका और खुरपका रोग से बचाने के लिए टीकारण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। जिले में 4,03630 पशुओं के टीकाकरण किया जाएगा।
Published on:
21 Mar 2025 10:45 am
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