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रतलाम।बेरोजगार युवकों को मोटी राशि के रोजगार का झांसा देकर करोड़ों
ठगने वाली पृथ्वी यूटीलिटी के बड़ौदा ब्रांच डायरेक्टर को पुलिस ने गिरफ्तार कर
लिया है। सोमवार को गुजरात पुलिस धोखाधड़ी के मामले में तस्दीक करने के लिए उसे
लेकर रतलाम पहुंची। इसके बाद उसे इंदौर ले जाया गया। मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण
तथ्य मिलने का उम्मीद है।
शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगारों को हर
माह तीन से पांच हजार रूपए के रोजगार का झांसा देकर प्रत्येक से13 हजार 500 रूपए
ठगने वाली मल्टी नेशनल कंपनी पर पुलिस का शिकंजा कस रहा है। रतलाम में दो थानों पर
पृथ्वी यूटीलिटी कंपनी के खिलाफ वष्ाü 2014 में ही धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज हुआ था।
इसकेबाद स्थानीय ब्रांच मैनेजरों की पुलिस ने गिरफ्तारी की थी। कंपनी के मुख्य
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मुख्य शाखा गुजरात बडौदा में भी रतलाम पुलिस ने दबिश दी
थी, लेकिन मुख्य आरोपी को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई।
अब स्थानीय
पुलिस के बाद गुजरात पुलिस ने भी इन धोखेबाजों की तलाश की है। पुलिस ने बड़ौदा
मुख्य ब्रांच के पृथ्वी यूटीलिटी के डायरेक्टर अनुराग सिंह चौहान को गिरफ्तार कर
लिया है। सोमवार को गुजरात पुलिस मुख्य आरोपी को लेकर रतलाम पहुंची।
झूठी
कहानी गढ़ दफ्तर किया बंद
स्टेशन रोड पुलिस के एएसआई आरएस भाभर ने बताया
कि कंपनी डायरेक्टर अनुराग सिंह रिमांड पर है। गुजरात पुलिस धोखाधड़ी के मामलों की
तस्दीक करने आई थी। इस दौरान उन्होंने उनके ऑफिस इत्यादि की तस्दीक की। उन्होंने
बताया कि 23 जुआई को चिंगीपुरा निवासी मोहम्मद रईस पिता सगीर अहमद ने रिपोर्ट दर्ज
कराई थी कि चिंगीपुरा निवासी अकबर पिता फराजान व उसके भाई आफात दोनों ने मिलकर
उन्हे पृथ्वी यूटिलिटी में आईडी बनाकर सदस्य जोड़ने पर प्रत्येक सदस्य के लिए 3000
हजार रूपए प्रति माह मिलने की बात कही। लोगों ने घर के ही काफी सदस्य जोड़ लिए हैं।
कंपनी ने आगजनी की झूठी कहानी मुख्य ऑफिस गुजरात की रचकर घाटा दर्शा दिया और लोगों
से लाखों ठग लिए।
माणकचौक में प्रकरण दर्ज
माणक चौक थाना
प्रभारी विपिन बॉथम ने बताया कि पृथ्वी यूटीलिटी के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण 3
जुलाई 2014 को थाने में दर्ज हुआ था। मो. जुनेद पिता अब्दुल कयुम निवासी भुट्टा
बाजार ने शिकायत दी थी कि कंपनी ऑनलाइन पैसा कमाने की स्कीम का लालच देती थी। रतलाम
फ्रेंचाइजी अकबर अली व अफाक अली के पास थी।
इनका ऑफिस 10 कॉलेज रोड
मार्डन पैथालॉजी के ऊपर रतलाम में था। प्रति व्यक्ति से सदस्य बनने के लिए 13 हजार
500 रूपए लेते है। कंपनी द्वारा ऑनलाईन यूजर आईडी व पासवर्ड दिए जाते थे। आवेदक के
द्वारा 37 आईडी खुलवाई गई थी। आरोपियों की राशि 4 लाख 99 हजार 500 रूपए दिए थे।
सैंकड़ों से की धोखाधड़ी
मामले में कंपनी का 37 आईडी खुलवाने के बाद
आजीवन तीन हजार रूपए माह वेतन निश्चित करने का नियम था। शुरूआत के दो-तीन माह तो
ऑनलाईन काम करने के बदले रूपए मिले। बाद में आरोपियों ने बहाने बनाना शुरू कर दिया
और दो-तीन माह बाद ऑफिस भी बंद कर दिया था।
जब पीडितों ने पता लगाया तो
सामने आया कि कंपनी के डॉयरेक्टर अनुराग सिंह पिता वशराज सिंह चौहान, विनोद कोठारी
पिता रायचंद कोठारी एवं फ्रेंचाईजी अकबर अली व अफाक अली ने ऑनलाइन मनी सर्कुलेशन
स्कीम के तहत सैकडों अन्य लोगों के साथ भी धोखाधड़ी कर रूपए जमा कराए गए। अभी तक 20
लोगों की शिकायत सामने आई है।
Published on:
18 Aug 2015 01:22 am
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