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भाग्य पुण्य से, सौभाग्य पुरुषार्थ से मिलता है

रतलाम

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Newsdesk

Jul 25, 2026

datia news

datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

फोटो आरटी-2481-
रतलाम. भाग्य पुण्य से मिलता है, लेकिन सौभाग्य पुरुषार्थ से मिलता है। रतलाम के लोगों को पुण्य से चातुर्मास मिला है, इसे तप, त्याग और तपस्या के पुरुषार्थ से सौभाग्य की ओर ले जाएं। जीवन में ऐसे अवसर बार-बार नहीं आते।
यह बात शुक्रवार सुबह प्रवचन में श्रमण संघीय प्रवर्तक प्रकाश मुनि निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित सौभाग्य प्रकाश दरबार में उन्होंने कहा कि भाग्य में पुण्य और पाप दोनों होते हैं। पुण्य फलता है तो भाग्य अच्छा कहा जाता है, लेकिन पाप का उदय हो तो नहीं। भाग्य, कर्म का फल है। हमें पुण्य से मनुष्य भव और जिन शासन मिला है, इसे व्यर्थ न जाने दें। सदकर्म कर अपने भाग्य को सौभाग्य में बदलने का प्रयास करें। धर्मसभा की शुरुआत में जाप किए गए। प्रकाश मुनि से राकेश छाजेड़ ने नौ उपवास, भंवरलाल ने पांच उपवास एवं अन्य गुप्त तपस्वियों ने अलग-अलग तप आराधना के प्रत्याख्यान किए। विनोद ज्ञामर ने तीन उपवास की तपस्या पूर्ण की। इस दौरान दर्शनमुनि, उपप्रवर्तनी सुमनप्रभा सहित आठ महासती, महासती चंदनबाला और कल्पना सहित विभिन्न जैन मंडलों के सदस्य उपस्थित रहे। संचालन संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने किया।