रतलाम। हिम्मत ए मर्दा तो मदद है खुदा यह कहावत इस बेटे पर सटिक बैठती है, जो अपनी 60 वर्षीय बूढी मां के अजमेर शरीफ की जियारत की आरजू को पूरा करने आर्थिक तंगी के चलते रिक्शा साइकिल से ही रवाना हो गया है। इंदौर से सफर की शुरुआत कर वह अजमेर जा रहा है, उसकी अजीब सी साइकिल को देखकर पत्रिका संवाददाता ने बातचीत की तो यह बात सामने आई। ट्रेन का किराया नहीं होने के कारण वह साइकिल रिक्शा से ही मां और बेवा बहन और उसके बच्चों को अजमेर शरीफ का लंबा सफर तय कर रहा है।
इंदौर निवासी हुसैन (25) पिता गुड्डू खां ने बताया कि उसकी 60 वर्षीय मां बिस्मिला की आरजू थी कि अजमेर शरीफ की जियारत को जाए। आर्थिक रूप से तंगी के कारण वह उसे ट्रेन से लेकर जाने में असक्षम महसूस कर रहा था। उसके बाद मां की धार्मिक भावना को भी वह कुचलना नहीं चाहता था। खुदा का नाम लेकर दो दिन पहले साइकिल रिक्शा में घर का सामान और बेवा बहन जुबेदा और मां को लेकर निकल पड़ा।
चार दिन लगेंगे अजमेर पहुंचने में
बहन दो बच्चे इब्राहिम और जिब्राइन के साथ रहती है। दो दिन में रिक्शा से इंदौर से रतलाम पहुंच गया। उसका कहना है कि चार से पांच दिन में अजमेर पहुंच जाएगा। उसका कहना है कि थकने के दौरान कहीं भी रिक्शा खड़ा कर वह आराम कर लेता है। उसकी तमन्ना है कि जैसे-तैसे कर मां की जियारत खुदा के दर पर पूरी हो जाए।
खुदा के बंदो की कमी नहीं
हुसैन का कहना है कि दुनिया में खुदा के बंदो की कमी नहीं है। उसे राह में कोई भी मिल जाता है और भोजन व नाश्ता करा देता है। वह उसे दुआ देता हुआ फिर हिम्मत करता हुआ, आगे के सफर के लिए रवाना हो जाता है। 200 से अधिक किलोमीटर का सफर उसने रिक्शे से तय कर लिया है। जल्द ही अजमेर शरीफ भी पहुंच जाएगा।