
यूपी सरकार का बड़ा आदेश: बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों से जूते-मोज़े उतारकर जांच करवाने पर पूर्ण रोक, सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP Board Exam Get Strict: उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026 की हाई-स्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित, आधुनिक और सम्मानजनक वातावरण में आयोजित कराने के लिए बुधवार को एक व्यापक और सख्त शासनादेश जारी किया है। इस आदेश में विशेष रूप से परीक्षा-केंद्र पर छात्रों से जूते-मोज़े उतरवाने की अप्रिय और विवादित प्रथा को रोकने, सीसीटीवी और ऑडियो रिकॉर्डिंग से निगरानी सुधरने, तथा महिला अभ्यर्थियों की तलाशी सिर्फ महिला स्टाफ से ही कराने के निर्देश शामिल हैं, ताकि परीक्षार्थियों का सम्मान और सुरक्षा दोनों एक साथ सुनिश्चित हो सकें।
पिछले कई वर्षों से परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा जांच के दौरान छात्रों से जूते और मोज़े तक उतरवाए जाने की प्रथा देखने को मिलती थी, जिसे लेकर अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों में तीखी आलोचना और असहजता की शिकायतें उठती रही हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए अब शासन ने पूरी तरह इस प्रथा को रोकने का निर्देश जारी किया है। आदेश के मुताबिक परीक्षा-केंद्र में छात्रों की जांच सिर्फ प्रवेश द्वार पर ही सीमित रहेगी और उससे आगे किसी भी प्रकार के शारीरिक जांच में जूते-मोज़े उतरवाना शामिल नहीं होगा। इस निर्देश के पीछे सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है, छात्रों के आत्मसम्मान की रक्षा करना और उन्हें गर्व के साथ परीक्षा में बैठने का माहौल देना।
अब सभी परीक्षा केंद्रों पर केवल प्रवेश द्वार पर ही परीक्षा-प्राधिकरण द्वारा सुरक्षा जांच करने को कहा गया है। इस दौरान मेटल डिटेक्टर और आवश्यकता अनुसार अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से जांच होगी, लेकिन छात्रों की शारीरिक असहजता न हो,यह सुनिश्चित करना केंद्रों की पहली प्राथमिकता रहेगी। परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक को निर्देश दिया गया है कि कोई भी छात्र अभद्र व्यवहार या असहजता का सामना न करे, तथा हर जांच सुचारू, शालीन और सम्मानजनक ढंग से संपन्न हो।
यूपी सरकार ने मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरों और ऑडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम की अनिवार्य निगरानी लागू कर दी है। इसका मकसद है कि परीक्षा-कक्ष में कोई भी संदिग्ध गतिविधि, नकल-प्रयास या अनुशासन-भंग का प्रयास तुरंत रिकॉर्ड और नियंत्रण कक्ष तक पहुँच सके। केंद्र पर लगे कैमरा या रिकॉर्डर अगर किसी कारण से खराब पाए जाएं, तो संबंधित परीक्षा अधिकारी के लिए यह आवश्यक होगा कि वह डीआईओएस (डीज़ोनल इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल शिक्षा) और कंट्रोल रूम को तुरंत सूचित करे।
सरकार ने महिला छात्रों की गोपनीयता और सम्मान पर विशेष बल देते हुए यह स्पष्ट आदेश दिया है कि छात्राओं की किसी भी प्रकार की तलाशी केवल महिला शिक्षिकाओं / महिला कर्मचारी द्वारा ही की जाएगी। इसी के अनुरूप, पुरुष स्टाफ को छात्राओं की तलाशी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा। यह निर्देश उन शैक्षणिक विशेषज्ञों के समर्थन में आया है, जिन्होंने बार-बार कहा है कि छात्राओं की जांच महिला कर्मियों द्वारा होनी चाहिए क्योंकि इससे छात्रों का मनोवैज्ञानिक दबाव कम होता है और उनकी सुरक्षा की भावना बढ़ती है।
आदेश में अन्य महत्वपूर्ण बिंदु भी शामिल हैं.
शासनादेश के मुताबिक, यूपी बोर्ड की दोनों 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं इस वर्ष 18 फरवरी से शुरू होकर 12 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएँगी। इस बीच लाखों छात्र परीक्षा-केन्द्रों पर अपने भविष्य के सपने साकार करने के लिए बैठेंगे। इस बार लगभग 52 लाख से अधिक परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होने के लिए पंजीकृत हैं, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की विशालता और चुनौती दोनों को दर्शाता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन **नए दिशा-निर्देशों से परीक्षा का दोहरा लाभ होगा,एक तरफ नकल-रोधी तंत्र और सुरक्षा कड़ी होगी, तो दूसरी तरफ छात्रों के आत्म-सम्मान और प्रतिष्ठा की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पूर्व की तुलना में अब तकनीकी निगरानी जैसे CCTV और ऑडियो रिकॉर्डिंग परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाएगी, जिससे किसी भी विवादित स्थिति या अनुशासन-भंग की घटना का जल्द पता लगाया जा सकेगा।
अभिभावक संगठनों और विद्यालय संचालकों ने सरकार के इन निर्णयों का स्वागत किया है। उनका कहना है कि छात्रों को सम्मानजनक, शांत और सुरक्षित वातावरण में परीक्षा देना उनकी बुनियादी अपेक्षा है, और अब यह दिशा-निर्देश इसी भावना को प्रतिबिंबित करते हैं।
Published on:
02 Feb 2026 05:00 am

बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
