जैन समुदाय में चातुर्मास पर्व का महत्व अधिक है, संतों के सान्निध्य में आत्म गुणों का प्रकाशन होता है। हनुमान रूंडी के पीछे करमचंद उपाश्रय में आचार्य विवेकचंद्र सागर सूरी ने सम्यक दर्शन, ज्ञान, चरित्र के गुण वेदक, शाश्वत सम्यक जो कि हृदय की मान्यता से सत्य है शिव है, सुंदर है उसे अपने ज्ञान से परिष्कृत करना वहीं आत्मा का गुण सम्यक है। ये विचार विवेकचंद्र सागर महाराज ने व्यक्त किए। इस मौके पर गणिवर्य प्रसन्नचंद्र सागर ने भी संबोधित किया।पारस भंडारी ने बताया कि शांतिनाथ तप 16वें दिन में प्रवेश कर गया।