
sewerage water
रतलाम। शहर के 18 मोहल्लों में गंदगी मिला हुआ पानी आ रहा है। इनमें से कुछ मोहल्ले वो भी शामिल है, जहां गुजरात की कंपनी ने सीवरेज लाइन और पेयजल लाइन को करीब कर दिया। सीवरेज लाइन टूट गई, मल मिला हुआ पानी नल में पेयजल के रूप में आ रहा है, मामला कलेक्टर कर जनसुनवाई, मानव अधिकार आयोग, मप्र विधानसभा, एनजीटी तक पहुंच गया, लेकिन बेशर्मी इतनी की हर जगह एक ही असत्य परोस दिया, सब ठीक कर दिया है। पेयलज की जो रिपोर्ट आई, वो चौकाने वाली है, उसके अनुसार लगातार इस प्रकार के पेयजल के उपयोग से कैंसर , किडनी और लीवर की बीमारी होने का खतरा है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को वार्ड नंबर 24 के पार्षद सलीम मोहम्मद बागवान ने ओझाखाली क्षेत्र में मकान नंबर 50 राजू भाई के घर का नल के पानी का नमूना लेकर 22 अप्रेल 24 को दिया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की जिला जल जांच प्रयोगशाला में पेयजल की जांच की गई। जल प्रयोगशाला द्वारा दी गई रिपोर्ट में कई पैरामीटर में दूषित मात्रा से काफी ज्यादा मात्रा पाई गई।
टोटल कोलिफार्म तथा फिकलकोलिफार्म निर्धारित लिमीट शून्य की तुलना में क्रमशः 760 तथा 690 पाया गया। पीने के पानी के 100 एमएल नमूने में ई-कोली बेक्टेरिया का 760 तथा 690 की मात्रा में आया। नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित अधिकतम लिमिट 45 एमजी प्रति लीटर के स्थान पर 53.4 एमजी प्रति लीटर आई। कैंसर जैसे खतरनाक रोग होते है। ठोस अपशिष्ट मात्रा एक एनटीयू की सीमा के स्थान पर 32.7 एनटीयू तथा कन्डक्टिवीटी शून्य माइकोएमएचओ एस. प्रति सेन्टीमीटर की सीमा की जगह 432 एमएचओएस पाई गई। पानी में दूषित गंध आपत्तिजनक सीमा में पाई गई।
पोरवाड़ो का वास, राम मोहल्ला, ओझा खाली, कुंजड़ों का वास, अशोक नगर, तेजा नगर, थावरिया बाजार की लंबी गली, कलईगर रोड, खेरादीवास, सिलावटों का वास, हरिजन बसती, रामगढ़, कॉलेज रोड, रत्नेश्वर रोड, जुनीकलालसेरी, लंबी गली, पीएंडटी कॉलोनी, मालवा नगर, गांधीनगर, लक्ष्मणपुरा, श्रीमालीवास आदि।
पूर्व में ओझाखाली के रहवासी कलेक्टर जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंच चुके है। तब अपर कलेक्टर डॉ शालिनी श्रीवास्तव को महिलाओं ने गंदे पानी से भरी बोतल तक दिखाई। इसके बाद जांच के आदेश दिए, लेकिन हर बार नगर निगम से यह रिपोर्ट भेज दी गई, सब सही कर दिया है, अब गंदा पानी नहीं आ रहा है। धरातल पर हालात इसके उलट है। जनसुनवाई में भाजपा पार्षद पति रामचंद्र डोई , विपिन पितलिया, जितेंद्र टांक, अशोक माली, प्रकाश कोठारी, मनोज रजवाड़िया, शांतिलाल जाट, सलमा खान, शबनम कुरैशी आदि ने कहा था नगर निगम द्वारा आश्वासन दिया गया था कि अमृत दो में पाइप लाइन बदलने के बाद समस्या हल हो जाएगी । लेकिन उसके बाद भी समस्या हल नहीं हुई , बल्कि गंदे पानी की मात्रा और बढ़ गई।
लगातार सीवरेज व गंदे पानी के उपयोग से कैंसर, लीवर, फेफडे़, गैस की समस्या होती है। हाल ही में इंदौर में सीवरेज के गंदे पानी के उपयोग के बाद बड़ा हादसा सामने आया। एक ही क्षेत्र के 10 लोगों की जान चली गई, जिसमें छह माह का बच्चा भी शामिल है। सीवरेज के गंदे पानी से हैजा , टाइफाइड, डायरिया, हेपेटाइटिस ए, पेचिश, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, और ई.कोलाई संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी होते हैं जो पेट, आंतों, लिवर और अन्य अंगों को संक्रमित करते हैं, जिससे उल्टी, दस्त, बुखार होता है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा भी हो सकता है।
दूषित पानी पीने या भोजन बनाने में इस्तेमाल करने से।
सीवेज के पानी के सीधे संपर्क में आने से, खासकर चोट या कट लगने पर।
मल-मौखिक मार्ग से, जब संक्रमित व्यक्ति का मल दूषित पानी या भोजन के ज़रिए दूसरों के मुंह में चला जाए।
हमेशा साफ़ और उबला हुआ पानी पिएं।
खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धोएं।
सीवेज के पानी के संपर्क से बचें और सफाई के लिए दस्ताने पहनें।
सुनिश्चित करें कि आपके घर की पाइपलाइन ठीक हो और सीवेज लीक न हो।
राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलााश विजयवर्गीय ने इस मामले में विधानसभा में अपने स्तर पर जानकारी लेने के बजाए नगर निगम रतलाम के अफसरों द्वारा भेजा गया असत्य परोस दिया। जब यह मामला विधानसभा में आया तब मंत्री ने कहा नगर निगम के पास यह जानकारी ही नहीं है कितने मकानों नल कनेक्शन है, हालांकि शहर में 48775 कनेक्शन है। पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है व गंदे पानी की शिकायत विलोपित हो गई है। जबकि हकीकत यह है अब भी शहर के 18 मोहल्लों में कहीं गंदा पानी, कहीं मटमैला पानी तो कहीं सीवरेज वाला पानी मिल रहा है।
शहर में सीवर की गंदगी युक्त पेयजल आपूर्ति पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नगर निगम एवं मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल की कार्यप्रणाली पर गंभीर असंतोष व्यक्त कर विस्तृत एवं तथ्यपरक जानकारी नहीं देने पर कडी फटकार लगाई है। सलीम मोहम्मद बागवान, पार्षद वार्ड नंबर 24 की एनजीटी में पिटीशन क्रमांक 09/2025(सीजेड) की सुनवाई के दौरान अंतरीम आदेश में नगर निगम को 3 माह में नया शपथ पत्र देने के आदेश दिए है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि अपने पूर्व आदेश दिनांक 2. अगस्त 2024 के बावजूद नगर निगम यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि शहर में वास्तव में पीने योग्य पानी की आपूर्ति हो रही है या नहीं।
एनजीटी में नगर निगम द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में केवल यह उल्लेख है कि पाइपलाइन का 58 प्रतिशत कार्य पूर्ण हुआ है, लेकिन पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति, पाइपलाइन बिछाने का पूर्ण विवरण, कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इस पर एनजीटी ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह अधिकतम तीन माह में अतिरिक्त शपथपत्र प्रस्तुत करे ।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के संबंध में ट्रिब्यूनल ने कहा कि निगरानी संबंधी निर्देशों का अक्षरशः पालन नहीं किया।निरीक्षण की तिथियां नहीं बताई गईं, निरीक्षण रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं रखी गई, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि रिपोर्ट किन अधिकारियों को भेजी। प्रदूषण नियंत्रण मंडल को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। अब अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट कहा है कि मामले की अगली सुनवाई में पेयजल जैसे मूल अधिकार से जुड़े विषय पर कड़ी निगरानी की जाएगी।
रतलाम नगर निगम में अमृत मिशन एक के तहत सीवरेज योजना की राशि जो 123.85 करोड़ थी , को राज्य स्तरीय तकनीकी समिति ने तीसरे प्राइस ब्रेकअप शेड्यूल के आधार पर बढाकर 141.44 करोड़ का कर दिया गया और मकान की संख्या 53273 से घटकर 43273 कर दी। राशि में 14.20 प्रतिशत की वृद्धि हुई और मकान की संख्या में 10 प्रतिशत की कमी हो गई। निर्माण के लिए लागत राशि में वृद्धि और मकान की संख्या में कमी की जानकारी राज्य स्तरीय तकनीकी समिति द्वारा दिनांक 2 अक्टूबर 2022 को दी गई। यह जानकारी विधानसभा में मेरे प्रश्न के उत्तर में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दी थी।
- प्रताप ग्रेवाल, विधायक, सरदारपुर
हाल ही में इंदौर में सीवरेज मिले पेयजल के उपयोग से 10 की मौत हो गई। मेरे क्षेत्र में 5500 लोग रहते है। हमारे यहां सीवरेज मिला पानी आ रहा है। तीन साल से मैं यह लड़ाईलड़ रहा हूं। विधानसभा से लेकर हर जगह असत्य बोला जा रहा है सब सही हो गया। अब तो लगने लगा है जैसे इंदौर में मौत के बाद कार्रवाई हो रही है, हमारी नगर निगम और प्रशासन को भी हमारे लोगों के मरने का इंतजार है, तब कार्रवाई करेंगे।
-सलीम बागवान, पार्षद, वार्ड 24, रतलाम
पत्रिका : शहर के 18 मोहल्लों में गंदा व सीवरेज का पानी जा रहा है।
आयुक्त : जहां यह समस्या आ रही है, वहां हमने जरुरत अनुसार सुधार करवाया है।
पत्रिका : इंदौर में मौत तक हो गई, ओझाखाली सहित अन्य जगह सीवरेज का पानी जा रहा।
आयुक्त : इसको समझाने की जरुरत है। किसी एक के घर में ऐसा हो रहा है तो वो अपने घर की लाइन को सुधार करवाए। पूरे मोहल्ले में ऐसा नहीं हो रहा है।
पत्रिका : मामला एनजीटी तक चला गया, आपको लगता सब असत्य बोल रहे।
आयुक्त : नहीं, यह नहीं बोल रहा, मेरा कहना है, कहीं सीमेंट की पेयजल लाइन है, टूट गई, उसमें सुधार करवा रहे है, लेकिन पूरे मोहल्ले में ऐसा नहीं हो रहा, कुछ के यहां है तो वो पहले अपने घर की लाइन सही करवाए।
पत्रिका : सब स्वयं को ही करना, तो पेयजल विभाग का अमला ही बंद कर देना चाहिए।
आयुक्त : ऐसा है, जहां जो गड़बड़ है, वो हम सूचना पर सही करते है। मुझे छह माह ही हुए है, कहीं पेयजल व सीवरेज लाइन साथ है तो उसके लिए आवेदन दिया जाए, सड़क खोदने का व्यय जमा करेगा तो सही करवा देंगे।
पत्रिका : सीधा सवाल, किसी की मौत पर नगर निगम जागेगा।
आयुक्त : एक की भी मौत नहीं होगी, सब सही है, जहां कमी है, वो सही हो जाएगा।
Published on:
02 Jan 2026 12:55 am
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